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दूसरी लहर से पैनिक होने की जरूरत नहीं, मास्क पहन-एसओपी का पालन कर दें कोरोना को मात

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जम्मू। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मन की बात की 76वीं कड़ी में कोरोना वॉरियर कश्मीर के डॉ. नावीद नजीर शाह से बात की। कोरोना की जंग में रमजान का पवित्र महीना होने के बाद भी वे अपने फर्ज को बखूबी निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में सैकड़ों मरीज कोरोना को मात देकर घर-परिवार में लौट आए हैं और घर की खुशियों में सबके साथ हैं। प्रधानमंत्री ने कोरोना संकटकाल में पैनिक मैनेजमेंट को लेकर उनके अनुभव सुने।
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डॉ. नावीद ने अनुभव शेयर करते हुए कहा कि जब कोरोना शुरू हुआ तो कश्मीर में सबसे पहला हमारा सीडी अस्पताल कोविड अस्पताल बना। उस समय लोगों में खौफ का माहौल था। वह समझते थे कि अगर किसी को कोरोना संक्रमण हो जाता है तो वह उसके लिए मौत का वारंट होगा। ऐसे में हमारे अस्पताल में जो डॉक्टर या पैरा मेडिकल काम करते थे उनमें भी एक खौफ का माहौल था कि हम इन मरीजों को कैसे फेस करेंगे। हमें भी तो संक्रमण होने का खतरा नहीं है। लेकिन जो समय गुजरा उसमें हमने देखा कि अगर सही से बचाव के तरीकों पर अमल करें तो सुरक्षित रह सकते हैं। हमारा स्टाफ भी सुरक्षित रह सकता है। इस विश्वास पर हम मरीज देखते गए। कुछ लोगों में बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे। हमने देखा कि 90 से 95 फीसदी से ज्यादा मरीज बिना किसी दवा के भी ठीक हो गए। वक्त जैसे-जैसे गुजरता गया लोगों में कोरोना का डर कम होता गया। अब जो दूसरी लहर आई है उसमें पैनिक होने की जरूरत नहीं है। इस बार भी हम बचाव के तरीके तथा एसओपी का पालन कर इस पर काबू पा सकते हैं। जैसे मास्क पहनना, सैनिटाइजर का प्रयोग करना, सामाजिक दूरी का पालन करना, भीड़भाड़ से दूर रहना आदि। इन सब पर अमल कर हम रोजमर्रा का काम भी बखूबी निभा सकते हैं और इस बीमारी से सुरक्षा भी पा सकते हैं।
वैक्सीन लगने के बाद कोरोना नहीं बनेगा जानलेवा, भ्रम निकाल सभी लगवाएं टीका
प्रधानमंत्री ने डॉ. नावीद से टीकाकरण को लेकर भी बात की। पूछा कि लोगों के मन में वैक्सीन को लेकर कई तरह के सवाल हैं। यह कितनी कारगर होगी और वैक्सीन के बाद कितना आश्वस्त रह सकते हैं। इस पर डॉ. नावीद ने कहा कि जबसे यह संक्रमण सामने आया तबसे इसका प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है। इस बीमारी को दो ही चीजों से मात दी जा सकती है। एक बचाव के उपाय अपनाकर और दूसरा टीके से। इस समय हमारे पास दो वैक्सीन कोविशील्ड व कोवाक्सिन उपलब्ध है जो यहीं बनी है। कंपनियों की ट्रायल में भी इसकी सफलता दर 60 फीसदी से अधिक है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में अभी 15 से 16 लाख लोगों को टीका लग चुका है। हां, सोशल मीडिया पर इसको लेकर कई प्रकार के भ्रम हैं। बताया जा रहा है कि इसके साइड इफैक्ट्स हैं। यहां जितने भी टीके लगे हैं उसमें किसी प्रकार के साइड इफैक्ट्स की बात सामने नहीं आई है। बुखार आना, पूरे बदन में दर्द या फिर टीके लगने वाले स्थान पर दर्द, यही सब कुछ सुनने को मिला जो आम तौर पर हर टीके में होता है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन लगने के बाद भी लोगों के पॉजिटिव होने को लेकर भ्रम था। कंपनियों ने भी साफ तौर पर कहा था कि वैक्सीन लगने के बाद भी लोग पॉजिटिव हो सकते हैं, लेकिन इसमें संक्रमण का स्तर कम होगा। यानी यह जानलेवा नहीं होगा। इसलिए सभी लोगों को अपने दिमाग से वैक्सीन को लेकर उत्पन्न भ्रम को निकाल देना चाहिए। जिसकी भी बारी आए वह टीका अवश्य लगाए। इससे न केवल वह सुरक्षित होगा बल्कि पूरा समाज व समुदाय भी सुरक्षित होगा।
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