जम्मू संभाग में हर साल किडनी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इनमें बड़ी संख्या में क्रोनिक किडनी फेलियर के पीड़ित पहुंच रहे हैं। लेकिन सरकारी स्तर पर किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा न होने से मरीजों को मजबूर जिंदगी के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ रहा है। इसमें उन्हें लाखों रुपये खर्च करने के साथ समय की बरबादी झेलनी पड़ रही है।
सुपर स्पेशलिटी के नेफरोलाजी विभाग के एचओडी डा. एसके बाली के अनुसार उच्चतम न्यायालय के आदेश पर किडनी प्रत्यारोपण सुविधा के प्रोजेक्ट का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था। लेकिन अभी कुछ खास नहीं हो पाया है। उल्लेखनीय है कि श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एंड साइंस (स्किम) में किडनी प्रत्यारोपण करवाने वाले मरीजों को सरकार की ओर से आर्थिक राहत दी जा रही है।
मगर जम्मू संभाग इस आधुनिक सुविधा से अभी पीछे रखा गया है। सरकारी स्तर पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन जीएमसी और सुपर स्पेशलिटी में ही डायलेसिस की सुविधा उपलब्ध है। जबकि स्वास्थ्य विभाग के किसी अस्पताल में ऐसी सुविधा नहीं है। सुपर स्पेशलिटी में हर माह चार सौ से अधिक किडनी मरीजों के डायलेसिस किए जा रहे हैं।
हर साल दो हजार से ज्यादा किडनी के मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें 25-40 आयु वर्ग के किडनी क्रोनिक फेलियर मरीजों की तादाद बढ़ी है। ऐसे मरीजों को डायलेसिस के सहारे कुछ समय रखा जाता है। लेकिन स्थायी चिकित्सा के लिए किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। मगर प्रत्यारोपण की सुविधा न होने से ऐसे मरीजों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।