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कश्मीर में अंतिम सांस ले रहा है अलगाववाद!

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पहले चरण में बंपर वोटिंग से पस्त हुए अलगाववादियों को दूसरे चरण के मतदान में भी अपनी शिकस्त अभी से नजर आने लगी है। मतदाताओं को डराने-धमकाने की कोशिशें बेअसर हैं। अलगाववादी मतदान प्रतिशत कम रखने में अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ रहे।
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दूसरे चरण में अलगाववादियों का गढ़ माने जाने वाले कुपवाड़ा और कुलगाम जिले की नौ विधानसभा सीटों पर मतदान होना है। यहां दो दिसंबर को वोट डाले जाएंगे। एक बार फिर से चुनाव बहिष्कार का कॉल किया गया है। जगह-जगह पोस्टर चिपकाए गए हैं। फोन पर चुनाव से दूर रहने की धमकी देने वाले कुछ युवक पकड़े भी गए हैं।

पाकिस्तान की ओर से चुनाव में गड़बड़ी फैलाए जाने की नापाक कोशिशें भी जारी हैं। इसी के तहत कई स्थानों पर आतंकी हमले किए गए। बुलेट पर बैलेट भारी पड़े. इसके लिए चुनाव आयोग तथा सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तैयारियां की हैं।
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सज्जाद लोन का मोदी से म‌िलना शुभ संकेत

कुपवाड़ा में चार लाख और कुलगाम में 3.20 लाख वोटर हैं। अलगाववादी नेता रहे सज्जाद लोन हंदवाड़ा विधानसभा सीट से मैदान में है। हंडवाड़ा तथा आस-पास की छह-सात सीटों पर लोन का जबर्दस्त प्रभाव माना जाता है। पिछले दिनों सज्जाद लोन ने प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर उनकी तारीफ करते हुए कहा था कि मिलकर ऐसा लगा जैसे वह अपने बड़े भाई से मिल रहे हैं।

दोनों की मुलाकात सियासी गलियारे में खूब चर्चा का विषय बनीं। भाजपा ने हंदवाड़ा से किसी प्रत्याशी को नहीं उतारा है। लोन के प्रभाव को देखते हुए ही अलगाववादियों को अपना खेल बिगड़ता नजर आ रहा है। इस वजह से उसने ताजा घटनाक्रम में वोट डालने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है।

जम्मू विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञानी प्रो. अनुराग गंगल का कहना है कि पहले चरण में अलगाववादी अपने प्रभाव का असर देख चुके हैं। अब धीरे-धीरे लोग बहिष्कार की धमकियों से उकता चुके हैं। वे विकास चाहते हैं। उम्मीद है कि दूसरे चरण में भी जमकर मतदान होगा और अलगाववाद का झंडा बुलंद करने वालों को मुंह की खानी पड़ेगी।
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