सदन की कार्यवाही जब दोबारा शुरू हुई तो विपक्ष ने हंगामा करने की कोशिश की, लेकिन डिप्टी स्पीकर ने उन्हें बोलने नहीं दिया। कहा कि उन्होंने मतभेद दूर करने की कोशिश की थी लेकिन विपक्ष अपने फैसले पर अटल है। अब सदन का वक्त जाया नहीं होने दिया जाएगा और चुनाव होगा।
इस पर विपक्ष के नेता शफी उड़ी ने फिर खड़े होकर 10 मार्च 1952 के साथ कुछ अन्य घटनाओं का हवाला देते हुए बताने की कोशिश की कि ऐसा भी हुआ था, लेकिन गुरेजी ने यह एक प्रक्रिया है ना कि नियम। इस बीच डिप्टी स्पीकर ने कानून मंत्री सैयद बशारत बुखारी से प्रस्ताव रखने को कहा।
उन्होंने डा. निर्मल सिंह का स्पीकर पद के लिए नाम प्रस्तावित किया। इस बीच नेकां के अब्दुल मजीद लारमी ने विपक्षी दलों की ओर से कांग्रेस के उस्मान मजीद को उम्मीदवार घोषित किया। नेकां के अली मोहम्मद सागर ने कहा कि हम अटल नहीं है लेकिन हम कानून के तहत स्पीकर का चयन करना चाहते हैं।
सरकार अटल है और संविधान की खिलाफत करने पर तुली हुई है। डिप्टी स्पीकर ने सदन में मौजूद सदस्यों से अपनी राय पेश करने को कहा जिन्होंने बहुमत से डॉ निर्मल सिंह को स्पीकर पद के लिए चुना। इस पर नाराज होकर विपक्षी दल के सदस्य सदन से वॉक आउट कर बैठे।
डॉ निर्मल सिंह के विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सत शर्मा, बशारत बुखारी, इंजीनियर रशीद, मियां अल्ताफ, मोहम्मद यूसुफ तारिगामी की मौजूदगी में पद ग्रहण करवाया और उन्हें मुबारकबाद पेश की।