लेह के नीमू पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लेह के नीमू में फारवर्ड लोकेशंस पर शुक्रवार तड़के पहुंचे। इस दौरान प्रधानमंत्री ने थलसेना, वायुसेना और आईटीबीपी के जवानों से बात की, उन्होंने जवानों का मनोबल भी बढ़ाया। जानिए नीमू क्षेत्र के बारे में कई अहम बातें....
नीमू इलाका सिंधु नदी के किनारे पर स्थित है, जोकि करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर है। लेह से कारगिल जाते वक्त नीमू रास्ते में पड़ता है। जोकि लेह की लिकिर तहसील में आता है। यहां से आठ किलोमीटर की दूरी पर मैग्नेटिक पहाड़ी है। इस पहाड़ी को ऑप्टिकल इल्यूजन के नाम से भी जाना जाता है। इसी इलाके में सिंधु और जंसकार नदी का संगम होता है।
यह भी पढ़ेंः पीएम के अचानक लद्दाख दौरे की कहीं ये तो नहीं वजह, जहां सांस लेना मुश्किल वहां बैठ सेना से की बात, देखिए ये तस्वीरें
इसी इलाके के आलची गांव में नीमू-बाजगो पनबिजली परियोजना चल रही है। भारत के इस कदम से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। साथ ही वह इस परियोजना पर विरोध भी जता चुका है। क्योंकि यहीं से सिंधु पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जाती है। अक्साई चिन और पीओके के लिहाज से इस क्षेत्र का बड़ा सामरिक महत्व है।
यह भी पढ़ेंः लद्दाख से जम्मू-कश्मीर तक ऐसे मुश्किल हालात में काम करती है सेना, तस्वीरें कराएंगी गर्व का एहसास
नीमू फॉरवर्ड पोस्ट ऐसे स्थान पर हैं जहां से युद्ध की स्थिति में भारतीय सेना के जवान पाकिस्तान और चीन दोनों पर निशाना साध सकती है। इतना ही नहीं युद्ध के दौरान यह पोस्ट काफी निर्णायक भूमिका अदा कर सकती है। इसी के चलते दुश्मन देश को यह पोस्ट अखरती रहती है।
पेड़-पौधे कम होने की वजह से पहाड़ियां साफ दिखती हैं। सर्दियों के मौसम में ये इलाका बर्फ से लकदक हो जाता है। भारतीय सेना ने 1999 में हुए कारगिल युद्ध के बाद इसी क्षेत्र में अपना सैन्य बेस बनाया था। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इसी इलाके से दुश्मन को सबक सिखाया जा सकता है। बता दें कि लेह सैन्य मुख्यालय की 14वीं कॉर्प्स के तहत यहां दो सैन्य बेस हैं। एक लेह और दूसरा नीमू में ही है।