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Jammu News: बेघर लोगों को ठौर नहीं, फुटपाथ व फर्श पर कट रहीं सर्द रातें

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जेएमसी शेड इंदिरा चौक के अंदर सो रहा आदमी।संवाद
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फोटो सहित
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-ग्राउंड रिपोर्ट : फुटपाथ से रैन बसेरा तक निरीक्षण
-एक शेल्टर में श्रमिक बिना बिस्तर सीधे फर्श पर सोते मिले
अंकित कुमार मिश्र, अभिषेक बड़ू
जम्मू। रात के 10:00 बज रहे हैं, तापमान करीब 8 डिग्री सेल्सियस है। कड़ाके की ठंड में बेघर लोगों की रात सड़क पर गुजर रही है। नगर निगम के दो रैन बसेरा शहर में हैं लेकिन यहां अब जगह नहीं है। बेघर, श्रमिक और जरूरतमंद लोगों की रातें शहर के फुटपाथों, दुकानों के छज्जों व रैन बसेरों के ठंडे फर्श पर गुजर रही हैं। अमर उजाला की रात के रिपोर्टर टीम ने मंगलवार को देर रात शहर के पुराने बस स्टैंड, इंदिरा चौक, ज्वेल चौक, रेलवे स्टेशन रोड, ग्रीन बेल्ट पार्क, लेबर कमिश्नर शेल्टर होम व बाहु फोर्ट शेल्टर हाउस सहित विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया।
नगर निगम की ओर से बने शहर के डोगरा हाल शेल्टर होम में छह से अधिक श्रमिक बिना गद्दे और बिना कंबल के फर्श लेटे मिले। उनके पास केवल पतली चादरें थीं जो ठंड रोकने में नाकाफी थीं। बोधराज, सुनील, अशोक कुमार व रणवीर सिंह ने बताया कि शेल्टर होम में जगह तो है, लेकिन बिस्तर की संख्या कम है। यहां पर बीते कुछ दिनों गंदा पानी आता जिससे दुर्गंध निकलती है, शौचालय में टूटा हुआ है। शाम आठ बजे सभी काम करके आते हैं, सुबह सात बजे तक चले जाते हैं।
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शहर के पुराने बस स्टैंड, ज्वेल चौक, ग्रीन बेल्ट पार्क, रेलवे स्टेशन रोड सहित कई स्थानों फुटपाथ पर भी लोग रात गुजारते दिखे। दुकानों के शटरों के सामने लोग पॉलीथिन, बोरे और गत्ते ओढ़कर ठंड से बचने की कोशिश करते मिले। रात करीब 11 बजे रेलवे स्टेशन के पास करीब दर्जनभर लोग हल्की चादरों में दुबके मिले, उन्होंने नगर निगम से राहत की बात कही।
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स्थानीय निवासियों ने उठाई प्रशासन से मांग
बाहु फोर्ट स्थित शेल्टर होम की प्रभारी बीना बक्शी ने कहा कि ठंड के इस मौसम में प्रशासन को शेल्टर होम की क्षमता और सुविधाओं में तत्काल सुधार करना चाहिए। रैन बसेरों में अतिरिक्त कंबल, गद्दे और गर्म पानी की उपलब्धता बढ़ाई जाए। रात के समय पुलिस व निगम की गश्त तेज की जाए। वे 35 बेघर लोगों को शेल्टर दे रही हैं।
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ठंड बढ़ने के साथ चुनौतियां भी बढ़ीं
तापमान में गिरावट के साथ शहर में बेघर लोगों के लिए स्थिति और कठिन हो गई है। रैन बसेरों की सीमित व्यवस्था और फुटपाथों पर ठिठुरती रातें प्रशासन के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखाती हैं। रिपोर्टिंग के दौरान सामने आई स्थितियों से साफ है कि जरूरतमंदों के लिए ठंड में राहत मुहैया कराने के लिए प्रशासन लाचार नजर आ रहा है।
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