जो बच्चे परीक्षाओं के दौरान देर रात तक पढ़ने का फोबिया पालते हैं उन्हें पढ़ाई कम और तनाव ज्यादा मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षाओं के दौरान दिमाग को शांत रखकर तैयारी करें। परीक्षा का शेड्यूल के मुताबिक ही रिवीजन करें। विषयों की तैयारी सुबह उठकर करें।
गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल मुबारक मंडी की पूर्व प्रिंसिपल एवं एचओडी डाइट शशि थापा का कहना है कि अक्सर बच्चे परीक्षाओं के दौरान रातभर पढ़ने में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करते हैं। यह धारणा उनके अभिभावकों में भी होती है, लेकिन शारीरिक और मानसिक स्तर पर यह प्रक्रिया बेहतर प्रदर्शन नहीं करती है।
देर रात तक पढ़ने वाले बच्चे का दूसरे दिन शारीरिक और मानसिक प्रदर्शन कमजोर पड़ जाता है। वर्तमान समय में अधिकांश बच्चे कामर्स और आर्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसमें कामर्स में बैंकिंग, आर्ट्स में केएएस, आईएएस आदि में बेहतर कैरियर हैं।
इसी तरह मेडिकल में डाक्टर बनने का कैरियर है। लेकिन इन सभी विषयों को बेहतर कैरियर को जानकर ही तैयारी करनी चाहिए। परीक्षाओं के दौरान परीक्षार्थियों को दिन में 6-8 घंटे पढ़ाई करनी चाहिए। लेकिन इसमें ध्यान रहे कि बीच में शरीर को आराम भी मिले।
इस प्रक्रिया को दिन में ही पूरी बनाए और देर रात तक पढ़ाई न करें। रिवीजन के दौरान खुद से तनाव को दूर रखे और सही मार्गदर्शन करें। अभिभावकों को भी चाहिए कि वे अपने बच्चों पर क्षमता से अधिक दबाव न थोपे। ऐसे में सीधा असर उसके प्रदर्शन पर पड़ेगा।
इस पर भी गौर करें
परीक्षा के शेड्यूल के मुताबिक रिवीजन किया जाए
परीक्षाओं के दौरान दिन में 6 से 8 घंटे पढ़ाई करनी चाहिए
जिन विषयों में कम पकड़ है, उनकी सुबह करें तैयारी
देर रात तक पढ़ाई करना भी अधिक फायदेमंद नहीं
तनाव को बिल्कुल हावी नहीं होने दें विद्यार्थी
बच्चों की क्षमता से अधिक दबाव नहीं बनाएं अभिभावक