एनजीटी ने केंद्रशासित प्रदेश-जम्मू और कश्मीर के मुख्य सचिव और प्रदेश की प्रदूषण नियंत्रण समिति को नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि स्थानीय प्रशासन ने यात्रा के दौरान इंतजाम करते हुए पर्यावरण के लिहाज से सुरक्षा मानकों की अनदेखी की है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पवित्र अमरनाथ यात्रा के दौरान मारे गए यात्रियों की मृत्यु पर संज्ञान लिया है। अधिकरण ने सूखी नदी में तंबू लगाने को लेकर इस दुर्घटना को पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी करार दिया है। इस संदर्भ में एनजीटी ने केंद्रशासित प्रदेश-जम्मू और कश्मीर के मुख्य सचिव और प्रदेश की प्रदूषण नियंत्रण समिति को नोटिस जारी किया है।
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इसमें कहा गया है कि स्थानीय प्रशासन ने यात्रा के दौरान इंतजाम करते हुए पर्यावरण के लिहाज से सुरक्षा मानकों की अनदेखी की है। दरअसल, अमरनाथ यात्रा के दौरान अति बारिश के चलते पवित्र गुफा के निकट बारिश के पानी के तेज बहाव के चलते नदी में पानी आ गया और 16 यात्री मारे गए थे।
एनजीटी ने नोटिस में कहा पर्यावरण नियमों के अनुसार नदी क्षेत्र में किसी भी तरह के रहने के इंतजाम नहीं किए जा सकते। यह संवेदनशील है और पर्यावरण नियमों के विपरीत है। एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल, जस्टिस सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य प्रोफेसर ए सेंथिल वेल की पीठ ने दो सितंबर को नोटिस जारी किया था।
जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एक महीने के भीतर उल्लंघन और दुर्घटना को रोकने लिए कार्य योजना सौंपने को कहा। विस्तृत सुनवाई के लिए पीठ ने मामले को 4 नवंबर, 2022 के लिए सूचीबद्ध किया।
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दरअसल, बृंदा मिश्रा की ओर से अमरनाथ में तंबू लगाने सहित अन्य कार्यों में पर्यावरण सुरक्षा व नियमों के उल्लंघन के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि नियमों का अनुपालन न होने की वजह से हादसा हुआ था।