जेएंडके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास राज्य में हालांकि दो लैबोरेटरी हैं। एक जम्मू और दूसरी श्रीनगर में, लेकिन बाढ़ के बाद श्रीनगर स्थित लैब बंद होने के बाद सारा भार जम्मू स्थिल लैब पर ही आ गया है। कश्मीर के सैंपल भी जम्मू ही जांच के लिए लाए जा रहे हैं। इसके कारण उद्योगपतियों के साथ कर्मचारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य में प्रदूषण के स्तर की जांच की जिम्मेवारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की है। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड फैक्ट्रियों और अन्य स्थानों से लगातार सैंपल लेता है और फिर इनकी जांच लैबोरेटरी में की जाती है।
जम्मू संभाग के सभी जिलों के सैंपल जम्मू स्थित लैबोरेटरी पहुंचाए जाते हैं, जबकि कश्मीर संभाग के सभी सैंपल श्रीनगर स्थित लैबोरेटरी में लिए जाते हैं। जहां इनकी जांच की जाती है और फिर रिपोर्ट तैयार करके वापस जिलों में भेजी जाती है।
इस प्रक्रिया में कई दिन लग जाते हैं। इसी कारण उद्योगपतियों और कर्मचारियों को हमेशा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रिपोर्ट देरी से पहुंचने के कारण उद्योगपतियों का काम प्रभावित होता है। जिलों में कार्यरत कर्मचारियों को इसी कारण कई चक्कर जम्मू के लगाने पड़ते हैं।
हर वर्ष जिला कार्यालयों से जिला स्तर पर लैबोरेटरी खोलने का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार के पास भेजा है, लेकिन आज तक इसको मंजूरी नहीं मिली है। परेशानी दिन-ब-दिन बढ़ रही है और जिला स्तर पर लैबोरेटरी खोलने के लिए कोई काम नहीं किया जा रहा है।
सितंबर में बाढ़ के कारण श्रीनगर की लैबोरेटरी पूरी तरह से खराब हो गई थी। ज्यादातर उपकरण बाढ़ की भेंट चढ़ गए। इसी कारण श्रीनगर में प्रदूषण की जांच का काम पूरी तरह से बंद पड़ा है। हालात यह बन चुके हैं कि अब श्रीनगर से सारे सैंपल जांच के लिए जम्मू लाए जा रहे हैं। इसी कारण जम्मू की लैबोरेटरी में काम ज्यादा बढ़ गया है।