अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे भारतीय गांवों में रहने वाले ग्रामीण अब आतंकवादियों से भी डरने लगे हैं। खासकर कठार गांव और इसके आसपास के गांवों में रहने वाले लोग आतंकी हमले के बाद से सहमे हुए हैं।
इससे पहले कभी भी अरनिया और आरएसपुरा सेक्टर में आतंकी हमला नहीं हुआ। पहले यहां के लोग पाकिस्तानी गोलियों से दुखी थे, अब आतंकी हमले से भी ग्रामीणों में खौफ का आलम है।
दरअसल, घटनास्थल के दो से तीन किलोमीटर के दायरे में कठार, पिंडी, जोइयां, अला और अरनिया आते हैं। करीब एक महीना पहले ही इन गांवों में पाकिस्तान की तरफ से बड़े पैमाने पर गोले बरसाए गए। कई लोगों के घरों में आकर गोले गिरते थे।
अब आतंकी हमले ने इन लोगों की दिक्कतें बढ़ा दी हैं। गांव अला के रहने वाले अशोक कुमार और बलविंदर सिंह का कहना है कि आज तक कभी उनके इलाके में आतंकी हमला नहीं हुआ।
सीमा पर संघर्ष विराम के उल्लंघन की घटनाएं आम हैं, लेकिन आतंकी हमले के बारे में कभी सोचा ही नहीं। अब यहां लोगों को डर लगने लगा है कि न जाने कब और कहां से आतंकी हमला हो जाए।
जोइयां के विजय कुमार और पिंडी के सुखदेव राज का कहना है कि जब हीरानगर और सांबा में आतंकी हमला हुआ था, तब उन्होंने नहीं सोचा था कि ऐसा उनके क्षेत्र में भी हो सकता है। उन्होंने गांव में सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
कई अनसुलझे सवाल-
आतंकियों द्वारा घुसपैठ कर अंदर तक घुस आना और सेना की वर्दी पहन कर बिना किसी रोकटोक के हमले को अंजाम देना कई सवाल खड़े करता है। घुसपैठ करने के बाद आतंकियों ने काफी समय बिताया और अपनी रणनीति बनाई। अब तक सेना यह भी पता नहीं लगा पाई है कि आतंकियों ने घुसपैठ कहां से की।