जीएमसी सहित एसोसिएटेड अस्पतालों में मरीजों को दी जा रही डाइट पर संकट बरकरार है। चुनाव के चलते डाइट के भुगतान का मामला लटक गया है। डाइट के लिए जीएमसी प्रशासन पर करीब दो करोड़ रुपये की देनदारी है।
अब नए साल में नई सरकार के साथ ही डाइट की देनदारी पर कुछ हो पाएगा। जीएमसी के प्रिंसिपल डा. घनश्याम देव गुप्ता का कहना है कि डाइट के भुगतान के लिए सरकार को लिखा गया है। लेकिन आचार संहिता के चलते अभी भुगतान नहीं हो पा रहा है।
जीएमसी सहित एसोसिएटेड अस्पतालों में एसएमजीएस, सीडी, साइक्रेटरी अस्पताल में सुबह, दोपहर और शाम की शिफ्ट में रोजाना 1100-1200 मरीजों को निशुल्क डाइट मुहैया करवाई जा रही है। जिला स्तर और दूरवर्ती क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए डाइट सेवा काफी राहत देती है।
नवंबर के शुरू में ठेकेदार एक दिन एसोसिएटेड अस्पतालों में डाइट सेवा ठप करके जीएमसी प्रशासन को चेता चुके हैं। लेकिन भुगतान न होने से डाइट सेवा पर ताला लगने का संकट भी बरकरार है। देनदारी के लिए जीएमसी सबसे आगे है।
ठेकेदारों का कहना है कि भुगतान न होने से उन पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। बाजार पर लाखों रुपये का कर्ज हो चुका है। कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया जा रहा है। जीएमसी में मरीज के साथ आए तीमारदार रोशनदीन ने कहा कि मरीजों को दी जा रही सुविधाओं को नियमित जारी रखने के लिए गंभीरता से काम किया जाना चाहिए।
एसोसिएटेड अस्पतालों में डाइट सेवा बंद होने पर आर्थिक तौर से कमजोर मरीजों को सीधा प्रभावित होना पड़ेगा। लिहाजा डाइट सेवा को जारी रखा जाना चाहिए।