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उस दिन सीजफायर नहीं होता, तो लाहौर भारत में होता

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1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान यदि दो दिनों तक सीजफायर नहीं होता, तो भारतीय सेना लाहौर और सियालकोट पर कब्जा कर लेती। हमारे जवान पाकिस्तान की सीमा में 18 किलोमीटर तक अंदर घुस गए थे।
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युद्ध के बारे में सेवानिवृत्त सूबेदार इंद्रजीत बताते हैं कि उनकी पलटन(9 जैकलाई) डिगसेई शिमला हिमाचल प्रदेश में थी। जैसे ही युद्ध शुरू हुआ, उन्हें आदेश मिला कि बाघा बार्डर पहुंचना है।

इसके बाद साजो सामान के साथ सभी रवाना हो गए। रातों रात बाघा बार्डर पहुंचे, जहां आदेश मिला कि अपनी पलटन के साथ पाक सेना पर धावा बोलते हुए आगे बढ़ें। इसके बाद किसी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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यदि दो दिनों के लिए सीजफायर नहीं होता

पाक सेना के टैंक भी उनकी कंपनी की ओर बढ़ रहे थे। इस बीच पाक सेना ने एक कंपनी को घेरे में ले लिया। इंद्रजीत सिंह के अनुसार जैसे ही उन्हें इसका पता चला, दूसरी ओर से मिग 58 गनों से गोलीबारी शुरू कर दी।

इस बीच हमारी वायु सेना ने भी बमबारी शुरू कर दी। कुछ देर के लिए हम थोड़ा पीछे हटे थे, लेकिन अधिकारियों के आदेश पर पाक सैनिकों के दांत फिर से खट्टे करने शुरू कर दिए। इसके बाद बुलंद हौसले के साथ आगे बढ़ते रहे।

एक दिन और एक रात में पाक सैनिकों को 18 किलोमीटर पीछे धकेलने में सफल रहे। इसी बीच पाक वायु सेना ने मोर्टार कंपनी पर बम बरसाने शुरू कर दिए। इसमें हमारी पलटन के 79 जवान शहीद हो गए। इंद्रजीत के अनुसार यदि दो दिनों के लिए सीजफायर नहीं होता, तो हमने लाहौर और सियालकोट पर कब्जा कर लेना था।
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