नदी और नालों पर अतिक्रमण के कारण लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश से तबाही का प्रमुख कारण नदी, नालों पर हुआ अतिक्रमण सामने आया है। नगर निगम और जिला प्रशासन भी अतिक्रमण लेकर गंभीर नहीं है। शहर में 272 छोटी नालियां और 17 बड़े नाले हैं जो तवी में आकर गिरते हैं। इनके शुरू होने से लेकर अंतिम छोर तक कहीं न कहीं लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है।
अगर छोटी नालियां दुकानों के आगे से गुजर रहीं है तो उन पर दुकानदारों ने पक्के थड़े बना लिए हैं या फिर दीवारें खड़ी कर दी। बड़े नाले भी अतिक्रमण के कारण अस्तित्व खो रहे हैं। कई जगह नालों का नामोनिशान ही नहीं बचा है। पंपोश कालोनी में नाले के ऊपर से ही तारकोल बनाकर सड़क बना दी गई थी, लेकिन पीछे पहाड़ी हिस्सों से तो नाला अभी तक चलता आ रहा है। वीरवार की बारिश ने सड़क उखाड़कर रख दी। तेज बहाव से कारें भी बह गईं।
कृष्णा नगर, जानीपुर, त्रिकुटानगर, गांधीनगर, बस स्टैंड, गुम्मट सहित कई हिस्सों और मोहल्ले से गुजरने वाले नाले पर लोगों ने दीवारें तक बना ली हैं या फिर ग्रीनरी लगा दी। इसके बाद नालों में बड़े स्तर पर कचरा फेंका जाता है। इनमें रजाई, गद्दे, कंबल समेत बिल्डिंग मैटेरियल भी शामिल होता है। इससे नाले जाम हो जाते हैं। पानी निकल नहीं पाता और यह उफनकर घरों में घुस जाता है। अगर शहर के सभी नदी, नालों से अतिक्रमण हटा दिया जाए, तो इस स्थिति से निपटा जा सकता है।
निगम को अतिक्रमण हटाने के दिए निर्देश
डीसी ने त्रिकुटा नगर के हालात जानने के बाद नगर निगम कमिश्नर को शहर के सभी हिस्सों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं ताकि आने वाले दिनों में इस प्रकार की परेशानियां दोबारा न उठानी पड़ी।