भूस्खलन के बाद उधमपुर के पंचैरी सरथल क्षेत्र में बचाव कार्य में जुटे जवानों को कहीं किसी की टांग मिल रही है तो कहीं बाजू। किसी का पूरा शव सोमवार को नहीं मिला। गांव के 35-40 चालीस लोगों के दबने के बाद शुरू हुए बचाव कार्य के दौरान मवेशियों के अंग भी मिलते रहे। सारा दिन बचाव कार्य चलता रहा। लोग सहमे हुए देखे गए।
सोमवार को दूसरे दिन भी सरथल, मुत्तल गांव में बचाव एवं राहत कार्य चलता रहा। हालांकि स्थानीय गांववासियों में प्रशासन की तरफ से कोई राशन, पानी, कंबल आदि नहीं पहुंचाने से गुस्सा है। गांववासियों के अनुसार एक साथ 35 से 40 लोगों के भूस्खलन में दबने के दस घंटे के बाद बचाव कार्य शुरू हुआ। उसके बावजूद सरथल और आसपास के गांव में राहत सामग्री नहीं पहुंची। इससे लोगों में रोष फैल रहा है। समय पर बचाव कार्य शुरू किया जाता तो कई लोगों की जान बच सकती थी।
सरपंच रमेश सिंह के अनुसार दूसरे दिन सोमवार भी बचाव कार्य चल रहा है, लेकिन राहत सामग्री नहीं पहुंच पाई है। लोगों के पास छत नहीं है। ऊंची पहाड़ियों पर शरण लिए हुए हैं। खाने का सामान भी नहीं है। आसपास करीब एक हजार लोग होंगे जो बारिश और भूस्खलन से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। लोगपहले से कुदरत की मार झेल रहे हैं, ऊपर से प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है।
करतार सिंह के अनुसार जिस जगह पर भूस्खलन हुआ है। वहां पर चार पांच किमी सड़क ही पूरी तरह बह गई है। उस क्षेत्र में पहुंचने के लिए कोई मार्ग नहीं है। भूस्खलन से चार पांच किमी का क्षेत्र दलदल बन गया है। प्रशासन के लोग दूर खडे़ हैं। आसपास गांव के लोग सामने की पहाड़ी से पूरा मंजर देख रहे हैं। जवान बचाव कार्य में लगे हैं, लेकिन जो पहाड़ी में लोग सुरक्षित हैं। लिए कोई भी राहत सामग्री नहीं पहुंच पाई है। प्रशासन लगातार दावे कर रहा है, जो अभी तक खोखले ही साबित हो रहे हैं।