फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाढ़ पैकेज: मोदी के मिशन कश्मीर पर मुहर

विज्ञापन
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए 2400 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की घोषणा कर बाढ़ से बने घाव पर मरहम लगाने की कोशिश की है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री के मिशन कश्मीर पर मुहर भी लगी है, जिसमें उन्होंने कश्मीरियों के सुख-दुख में भागीदार बनने और रियासत के विकास का खाका खींचा था।
विज्ञापन


 रियासत में सरकार बनने के बाद विशेष पैकेज की घोषणा को कश्मीरियों का विश्वास जीतने की पहल के रूप में भी देखा जा रहा है। सितंबर में आई प्रलयकारी बाढ़ के बाद मोदी ने श्रीनगर पहुंचकर हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया था। उस समय रियासत में उमर अब्दुल्ला की सरकार थी।

बाढ़ का प्रकोप खत्म होने के बाद तबाह घाटी के लोगों का दुख-दर्द बांटने के लिए उन्होंने पिछले साल दीवाली भी कश्मीरियों के साथ मनाई। समय बीता, राज्य में चुनाव हुए और पीडीपी-भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनी।
विज्ञापन


रियासती सरकार के सौ दिन पूरे हो गए। इस बीच केंद्रीय टीम ने रियासत में जम्मू तथा कश्मीर संभाग का दौरा कर बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया। संसदीय समिति ने भी इस मुद्दे पर पिछले दिनों राज्य का दौरा कर वस्तुस्थिति की जानकारी ली।

केंद्र सरकार ने विशेष पैकेज की घोषणा की

रियासत में विकास की गाड़ी को फिर से पटरी पर लाने के लिए केंद्रीय पैकेज की आवश्यकता पर बल दिया गया। उधर, विश्व बैंक भी क्षतिग्रस्त ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए ऋण देने पर तैयार हो गया।

माना जा रहा है कि केंद्र सरकार की ओर से पिछले दिनों भेजी गई टीम के आकलन के बाद ही केंद्र सरकार ने विशेष पैकेज की घोषणा की है। इससे रियासत में राहत एवं पुनर्वास में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

साथ ही यह भी कहा जा रहा है बाढ़ पीड़ितों की मदद कर उनके कारोबार को पटरी पर लाया जा सकता है। रियासत के डिप्टी सीएम डा. निर्मल सिंह कहते हैं कि केंद्र सरकार ने बाढ़ पीड़ितों की मदद का भरोसा दिया था जिस पर अमल शुरू हो गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रियासत को इस तबाही से उबारने की बात कही थी। धीरे-धीरे इस दिशा में पहल शुरू हो गई है।

उमर सरकार ने 44000 करोड़ का दिया था प्रस्ताव

उमर सरकार ने रियासत में बाढ़ राहत एवं पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार को 43960 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था, लेकिन केंद्र ने आवश्यक संशोधनों के लिए इस प्रस्ताव को लौटा दिया था।

इसके बाद केंद्रीय टीम भेजकर नुकसान के आकलन का फैसला लिया गया। इस बीच रियासती सरकार के वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू ने विधानसभा में पहला बजट प्रस्तुत करते हुए पूर्ववर्ती सरकार के कामकाज पर टिप्पणी की थी।

उनका कहना था कि पूर्ववर्ती सरकार के नुकसान के आकलन से न तो सरकार सहमत है और न ही इसके तरीके से।
विज्ञापन

बजट में बाढ़ की तबाही से उबरने की झलक

रियासत सरकार की पहले बजट में भी बाढ़ की तबाही से उबरने की झलक दिखी थी। इसके तहत बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास को सबसे बड़ी चुनौती मानते हुए सरकार ने कई छूट देने की घोषणा की थी।

उद्योग और व्यापार जगत को सितंबर से मार्च तक का सात महीने के बिजली किराये से छूट, ट्रांसपोर्ट उद्यमियों को सितंबर से दिसंबर 2015 तक पैसेंजर टैक्स से छूट तथा होटल उद्यमियों को मार्च 2016 तक जीएसटी एवं एंट्री टैक्स से छूट की घोषणा की गई थी। इसके साथ ही अलग राहत एवं पुनर्वास विभाग का भी गठन किया गया।

नेकां और कांग्रेस ने पैकेज को मजाक बताया

नेकां और कांग्रेस ने केंद्र सरकार के विशेष पैकेज को नाकाफी बताते हुए कहा कि उनकी सरकार ने 44000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था। केंद्र सरकार की ओर से घोषित पैकेज से बाढ़ पीड़ितों को राहत मिल पाना मुश्किल है। केंद्र की घोषणा बाढ़ पीड़ितों के साथ मजाक के अलावा कुछ नहीं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें