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जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास का रास्ता साफ , रोजगार के खुलेंगे द्वार

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जम्मू। डोमिसाइल व्यवस्था के बाद केंद्र ने नए जम्मू-कश्मीर में भूमि स्वामित्व नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब बाहरी राज्यों के लोग प्रदेश में गैर कृषि भूमि खरीद सकेंगे। इससे जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास का रास्ता भी साफ हो गया है। अब उद्योगों के लिए आसानी से जमीन उपलब्ध हो सकेगी। जम्मू-कश्मीर में नए उद्योग एवं संस्थान आने से रोजगार के द्वार खुलेंगे। वैश्विक निवेशक सम्मेलन कराने की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार का यह फैसला कई मायनों में अहम माना जा रहा है।
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जानकारों का कहना है कि नए नियमों से पूरे प्रदेश में सरकार की ओर से चिह्नित औद्योगिक क्षेत्रों में देश की नामी गिरामी कंपनियां भी अपनी इकाई लगाने के लिए आगे आएंगी। अब तक जमीन का मालिकाना हक न मिल पाने की वजह से कंपनियां इस दिशा में बहुत दिलचस्पी नहीं दिखातीं थीं। इस वजह से यहां बहुत कम ही औद्योगिक इकाइयां हैं। लोगों को रोजगार के लिए बाहरी राज्यों का रुख करना पड़ता रहा है। चाहे जम्मू संभाग हो या फिर कश्मीर, दोनों ही जगह उद्योग धंधे के मामले में स्थिति एक सी है। जानकार यह भी बताते हैं कि शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी आमूल चूल परिवर्तन देखने को मिल सकता है। कई निजी संस्थान यहां अपनी शाखाएं खोलने को आगे आ सकते हैं। बताते हैं कि अभी यहां स्वास्थ्य तथा शिक्षा सुविधाओं का घोर अभाव है। इस वजह से लोगों को इलाज के लिए लुधियाना या फिर दिल्ली का रुख करना पड़ता है। उच्च शिक्षा के लिए भी यहां के युवाओं को बाहरी राज्यों में जाना पड़ रहा है।
अनुच्छेद 370 व 35ए थी सबसे बड़ी बाधा
जम्मू-कश्मीर में उद्योग धंधे स्थापित न होने तथा निवेश न होने के लिए अनुच्छेद 370 व 35ए बहुत बड़ी बाधा थी। इसके तहत कोई भी बाहरी व्यक्ति यहां किसी प्रकार की अचल संपत्ति नहीं खरीद सकता था। यानी जमीन खरीदने के लिए व्यक्ति के पास पीआरसी (स्थायी निवास प्रमाणपत्र) का होना जरूरी था। बिना इसके कोई भी यहां एक इंच जमीन भी नहीं खरीद सकता था। इस वजह से लोग यहां निवेश करने से कतराते थे। हालांकि, कुछ उद्योग-धंधे सरकार से अनुमति लेेकर यहां चल रहे हैं।
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पूर्व एडवोकेट जनरल बोले: अब बाहरी लोगों के जमीन खरीदने में कोई कानूनी बाधा नहीं
प्रदेश के पूर्व एडवोकेट जनरल मोहम्मद इशहाक कादरी का कहना है कि नए कानूनों से अब बाहरी लोगों के जमीन खरीदने में कोई कानूनी बाधा नहीं रह गई है। इन संशोधनों ने राज्य के बाहर के लोगों के लिए जमीन खरीदने का रास्ता खोल दिया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने उन सभी बाधाओं को हटा दिया है जिसके चलते यहां कोई बाहरी व्यक्ति अचल संपत्ति नहीं खरीद सकता था। यह जरूर है कि कृषि योग्य भूमि का मालिकाना हक सुरक्षित है। इन जमीनों को खरीदने पर रोक है।
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