कश्मीरी पंडितों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिलाने में जम्मू-कश्मीर सरकार की भूमिका काफी अहम होगी। जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष संवैधानिक दर्जे के चलते अल्पसंख्यक मामलों का राष्ट्रीय आयोग इस संबंध में खुद फैसला नहीं ले सकता। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक कश्मीरी पंडितों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने के लिए सबसे पहले राज्य सरकार की ओर से केंद्र को सिफारिश भेजनी होगी।
आयोग के चेयरमैन वजाहत हबीबुल्लाह ने कहा, ‘मैं पंडित समुदाय की मांग का समर्थन करता हूं और इस संबंध में मैंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भी बात की है। उन्होंने सकारात्मक जवाब दिए हैं। लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई फैसला नहीं लिया गया है।’ इसी कारण से सिखों को भी राज्य में अल्पसंख्यक का दर्जा हासिल नहीं है।
बहाई और कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों ने हाल ही में अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेप्तुल्ला से मुलाकात की थी और मांग की थी कि उन्हें राज्य में अल्पसंख्यक का दर्जा मिलना चाहिए। बहाई समुदाय के लिए चीजें ज्यादा आसान हैं क्योंकि पूरे देश में उनकी संख्या कम है।
सूत्रों ने बताया है कि मंत्रालय इनके मामले को सहानुभूति की दृष्टि से देख रहा है। उन्होंने आग्रह किया है कि जिस ढंग से यूपीए सरकार ने लोकसभा चुनावों से पहले जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया, उसी तर्ज पर उन्हें भी अल्पसंख्यक का दर्जा मिलना चाहिए।