मंदिरों के शहर जम्मू में आने वाले पर्यटकों की अकसर शिकायत होती है कि एयरपोर्ट पर उन्हें वह सुविधाएं नहीं मिल पाती, जो अन्य शहरों के एयरपोर्ट पर मिलती हैं। लेकिन अब जम्मू एयरपोर्ट को नया रूप देने की कवायद चल रही है।
इसमें बड़ें विमानों के लिए रनवे एक्सटेंशन के साथ नया टर्मिनल बन रहा है। इस संबंध में जम्मू एयरपोर्ट के डायरेक्टर डीके गौतम की अमर उजाला के साथ विसतार से बातचीत। पेश हैं उसके प्रमुख अंश।
बेलीचराना में बनेगा नया टर्मिनल
जम्मू एयरपोर्ट का नया टर्मिनल बेलीचराना में तैयार होगा। 138 एकड़ जमीन में बनने वाले टर्मिनल अत्याधुनिक सेवाओं से लैस होगा और लोगों को अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट जैसी अनुभूति मिलेगी।
एयरपोर्ट डायरेक्टर के अनुसार योजना बनकर तैयार है, बस रियासती सरकार की ओर से जमीन हैंडओवर का इंतजार है। जिस पर तेजी से काम चल रहा है।
2016 में यदि जमीन स्थानांतरण कार्य पूरा हो जाता है तो 2021 तक टर्मिनल तैयार हो जाएगा। नए टर्मिनल की इमारत बेलीचराना की ओर बनेगी और वहीं से प्रवेश व निकासी द्वार होगा।
बड़े विमान 2018 तक संभव
वर्तमान में जम्मू में बड़े विमान उतरने की सुविधा नहीं है। इसके लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। डीके गौतम के अनुसार वर्तमान में जम्मू एरपोर्ट का रनवे 6700 फुट है, जिसमें 1300 फुट का विस्तारीकरण किया जा रहा है।
इसकी जमीन जल्द ही हैंडओवर होगी और 2018 तक रनवे तैयार हो जाएगा। इसके लिए सरकार की ओर से तीन सिंचाई के चैनल और एक सड़क बंद कर जमीन दी जानी है।
नए रनवे से बड़े घरेलू विमान उतरने के अलावा जम्मू पहुंचने वाले विमानों की संख्या भी बढ़ेगी। वर्तमान में जम्मू एयरपोर्ट पर रोजाना 16-18 विमान ही उतर पाते हैं।
अब विमान में सीढ़ी लगाने की जरूरत नहीं
जून माह के बाद जम्मू एयरपोर्ट एरो ब्रिज की सुविधा से लैस हो जाएगा। वर्तमान में जब विमान एयरपोर्ट पर उतरते हैं तो पैसेंजर के उतरने के लिए सीढ़ी लगाई जाती है।
पैसेंजर की सुविधा के लिए बड़े एयरपोर्ट की तर्ज पर एरो ब्रिज बनाया जा रहा है। विमान लैंडिंग के बाद सीधे एरो ब्रिज से जुड़ेंगे और पैसेंजर सीधा एयरपोर्ट बिल्डिंग पर उतर पाएंगे।
एयरपोर्ट डायरेक्टर के अनुसार यह सुविधा जून के अंत तक आरंभ हो जाएगी। इसके अलावा पैसेंजर लांज का भी विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में 370 पैसेंजर उतरने की क्षमता है। इसे बढ़ाकर 740 किया जा रहा है, ताकि पिक आवर में यात्रियों को उतारा जा सकेगा।
वॉच आवर एक्सटेंशन न होने से परेशानी
जम्मू एयरपोर्ट का रनवे इंडियन एयरफोर्स के अधीन है। इसकी देखरेख एयरफोर्स स्टाफ द्वारा की जाती है। जम्मू में वॉच आवर, यानी विमान उतरने की समय सीमा काफी कम है।
इसी कारण विमानों की संख्या बढ़ाई नहीं जा सकी। डायरेक्टर के अनुसार यहां सुबह 9.15 बजे पहली फ्लाइट दिल्ली से पहुंतती है और यहां से अंतिम उड़ान 4.15 बजे होती है।
यदि वाच आवर बढ़ा दिए जाते हैं तो विमानों की संख्या बढ़ जाएगी। एयरपोर्ट अथारिटी लगातार एयरफोर्स के संपर्क में है। जल्द इस पर कोई निर्णय आने की उम्मीद है।
डायरेक्टर के अनुसार सुबह के समय नई दिल्ली के लिए उड़ान नहीं भरी जा पाती, क्योंकि दिल्ली से आने वाले विमान ही लौटने के क्रम में दोपहर के समय जम्मू से उड़ान भरते हैं।
यदि अन्य राज्य सरकारों की तरह जेएंडके सरकार विमान के तेल में कुछ रियायत विमन कंपनियों को दे, तो विमान कंपनियां रात के समय भी यहां विमान रोक सुबह-सुबह दिल्ली के लिए उड़ान भर सकते हैं। राजस्थान सरकार ने इस तरह की सुविधा विमान कंपनियों को प्रदान की है।
सीआईएसएफ के हवाले नहीं हुई सुरक्षा
देश के 80 फीसदी से ज्यादा एयरपोर्ट पर सुरक्षा की जिम्मेदारी सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (सीआईएसएफ) के हवाले है, लेकिन जम्मू एयरपोर्ट संवेदनशील की सूची में शामिल होने के बावजूद सुविधा से वंचित है। यहां जेएंडके पुलिस ही सुरक्षा देखती है।
यहां एक एसएसपी, चार डीएसपी, 15 इंस्पेक्टर व अन्य नीचे का स्टाफ है। हालांकि इस संबंध में ब्यूरो आफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी इस संबंध में गृह मंत्रालय के संपर्क में है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद ही यहां की सुरक्षा सीआईएसएफ को दी जा सकेगी।