पहली बार मुस्लिम बहुल राज्य जम्मू-कश्मीर में भाजपा एक मार्च को सरकार का हिस्सा बनने जा रही है। यह प्रधानमंत्री मोदी के मिशन कश्मीर का अहम पड़ाव होगा।
दरअसल, देशभर में मोदी पर मुस्लिम विरोधी होने के लग रहे आरोपों से तिलमिलाई भाजपा ने रियासत की सियासत में गेमचेंजर बनने का सपना काफी दिन से पाल रखा था।
कश्मीर में सरकार बनाकर मोदी राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेश देने के साथ ही यह भी बताना चाहते हैं कि पूरी पार्टी के लिए सिर्फ विकास, शांति और अमन ही मूल मंत्र है।
पार्टी सिर्फ और सिर्फ विकास की राजनीति करना जानती है, अन्य मुद्दे गौण हैं।
घाटी में अपनी जमीन तैयार करने में जुटी भाजपा
गठबंधन का मुफ्ती ने स्वागत करते हुए यहां तक कहा कि यह दोनों के लिए ऐतिहासिक है। उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव मिल रहे हैं ऐसा लग रहा है। भाजपा दरअसल मिशन 2020 को साधने में जुटी है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि रियासत में सरकार के बहाने वह घाटी में अपनी जमीन तैयार करने में जुटी है।
इसी के तहत उसने विधानसभा में एक भी सीट न मिलने के बाद भी घाटी से सौफी यूसुफ को विधान परिषद में भेजा। अब पार्टी के कुछ प्रमुख चेहरे को विधान परिषद में नामांकित भी किया जा सकता है। यह सब भाजपा पर मुस्लिम विरोधी होने के लग रहे दाग को धोने की दिशा में कदम है।
दिल्ली की हार के बाद रियासत में भगवा खेमे की सरकार और भी अपरिहार्य माने जाने लगी थी। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में उसने एड़ी चोटी भी एक कर दिया था।
विकास और खुशहाली पर बनी बात
कश्मीरियों का दिल जीतने की मोदी ने भरपूर कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। चुनाव परिणाम के बाद से लगातार भाजपा सरकार बनाने के लिए प्रयासरत रही।
कुछ दिनों तक नेशनल कांफ्रेंस से बात चली, फिर पीडीपी के साथ निर्णायक बातचीत शुरू हो गई। अंतत: रियासत में पहली बार सरकार बनाने के लिए दोनों दलों के बीच सहमति बन गई।
भाजपा-पीडीपी के बीच गठबंधन के लिए बने न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) का ऐलान हालांकि पहली मार्च को शपथ ग्रहण के बाद होगा, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इसमें केवल विकास, शांति और रियासत की खुशहाली को तरजीह दी गई है।
सीएमपी में अनुच्छेद 370 और अफस्पा पर दोनों दलों में मौन रहने पर सहमति का भी जिक्र होगा।