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नेशनल कॉन्फ्रेंस कार्यकर्ताओं की हत्या में बीजेपी-आरएसएस का हाथ: शमीमा फिरदौस

Sun, 07 Oct 2018 06:01 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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Shamima Firdous - फोटो : अमर उजाला
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श्रीनगर में हब्बाकदल क्षेत्र से नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक शमीमा फिरदौस ने पार्टी के दो कार्यकर्ताओं की हत्या के लिए राज्यपाल प्रशासन और बीजेपी, आरएसएस को भी जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने दावा किया था कि वह निकाय चुनाव साफ तरीके से कराएंगे और सभी अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए जाएंगे। इसके बावजूद यह वारदात देखने को मिली।
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शमीमा के अनुसार घटना स्थल के आसपास कोई भी पुलिस कर्मी मौजूद नहीं था, जबकि हमलावरों ने दो बार हमला किया। यह घटना राजनीतिक लाभ के लिए पूरी साजिश के साथ अंजाम दी गई है। इस हत्याकांड की तफ्तीश कराने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि राज्यपाल जो साफ सुथरा चुनाव कराने जा रहे हैं क्या अब इस वारदात की जिम्मेदारी और हत्यारों को सामने लाना उनकी जिम्मेदारी नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों कार्याकर्ताओं की हत्या में बीजेपी और आरएसएस का हाथ है। ऐसे में इस प्रकरण की जांच होनी चाहिए।
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यह थी घटना जिसमे दो नेकां कार्यकर्ताओं की हुई थी हत्या, एक है गंभीर रूप से घायल

निकाय चुनाव से दो दिन पहले आतंकियों ने शहर के करफाली मोहल्ला में तीन नेकां कार्यकर्ताओं को गोली मार दी। इसमें दो की मौत हो गई। तीसरे का अस्पताल में इलाज चल रहा है। घटना के बाद आतंकियों की तलाश में पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन चलाया गया था। पूरे शहर में चौकसी बढ़ा दी गई थी। कई जगहों पर नाके भी लगा दिए गए है।
 
शुक्रवार सुबह करीब 11:15 बजे पुराने शहर के हब्बाकदल इलाके का करफली मोहल्ला गोलियों की गूंज से दहल उठा। पुलिस ने घटना में मरने वालों की शिनाख्त पंपोश कॉलोनी नूरबाग के नजीर अहमद और कनीकदल के मुश्ताक अहमद के रूप में की है। जबकि घायल की शिनाख्त कनीकदल के शकील अहमद के तौर पर की गई है। मारा गया नजीर हब्बाकदल की विधायक शमीमा फिरदौस का पीआरओ था। घायल शकील नेकां का पंचायत अध्यक्ष है और उसकी मोहल्ले में मीट की दुकान है।

जिस समय यह घटना घटी तीनों मीट की दुकान पर बैठे थे। मोटरसाइकिल सवार दो आतंकी दुकान के बाहर आकर रुके। इनमें एक के पास एके-47 राइफल और दूसरे के पास पिस्टल थी। दोनों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। कसाई दुकान से भाग निकला जिसका पीछा उन आतंकियों ने थोड़ी दूर तक किया। इस दौरान उसकी बाजू पर गोलियां लगी और वह बच निकला। यह भी पता चला है कि मारे गए दोनों 90 के दशक में आतंकी भी रह चुके थे। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।

घटना के तुरंत बाद पुलिस और सीआरपीएफ ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए। गोलियों की आवाज सुनने पर इस मोहल्ले की तंग गली से लोग जान बचाते भागते दिखे थे।
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