जम्मू। महानवमी पर वीरवार को देश सहित प्रदेश में कंजक पूजन के साथ शारदीय नवरात्र संपन्न हो गए। कंजक पूजन के बाद बहते जलस्थलों पर साख विसर्जन कर भक्तों ने कोरोना के खात्मे और सुख समृद्धि की दुआ मांगी है। महामाई के जयकारों से दिनभर माहौल को भक्तिमय बना रहा। शहर के प्रमुख बावे वाले मंदिर सहित अन्य मंदिरों में महामाई के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में श्रदालु पहुंचे।
शहर में कंजक पूजन के लिए सुबह से ही कंजकों को ढूंढने का सिलसिला शुरू हो गया था। घरों पर गली मोहल्लों से कंजकों को बुलाकर लाया गया। इसके साथ कुछ कंजकों की टोलियां खुद ही गली मोहल्लों तक पहुंची। महामाई का स्वरूप कंजकों के पैर छूककर उन्हें पारंपरिक हलवा पूढ़ी और अन्य उपहार देकर आशीर्वाद लिया गया। महानवमी पर बाजारों में खरीदारों की भीड़ भी पहुंची। आगामी शादी विवाद सीजन की खरीदारी के लिए बाजारों में रौनक बढ़ी है। इसके साथ महामाया मंदिर, नगरोटा स्थित कोल कंडोली मंदिर, पक्का डंगा स्थित मां लक्ष्मी मंदिर आदि मंदिरों में भी भक्तों की भीड़ पहुंची।
पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ आज मनेगा दशहरा
जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार को विजय दशमी का पर्व पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। प्रदेश के पुनर्गठन और कोविड महामारी के कारण दो साल से सार्वजनिक तौर पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन नहीं किया गया है। इस साल भी पुतलों का दहन नहीं किया जाएगा। हालांकि मोहल्ले स्तर पर छोटे-मोटे पुतलों का निर्माण किया गया है, जिसमें स्थानीय लोग दहन करेंगे। अवकाश के चलते विजयदशमी पर बाजारों में खरीदारों की अधिक भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। एडीसी सतीश शर्मा ने बताया कि सार्वजनिक तौर पर पुतलों के दहन की अनुमति नहीं दी गई है।