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राष्ट्रीय पुलिस दिवसः देश की सुरक्षा के लिए अब तक जम्मू-कश्मीर पुलिस के 1059 अफसर और कर्मी कुर्बान

Wed, 21 Oct 2020 02:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा अजय मीनिया, जम्मू  

सार

  • तीन दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रही जम्मू-कश्मीर पुलिस
  • अब तक आतंकवाद से लड़ाई में 1059 पुलिस अफसर और कर्मी हो चुके शहीद
  • 30 साल पहले बना था आतंकी विरोधी दल, देश का पहला राज्य था
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jammu kashmir police - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूं तो आतंकवाद-अलगाववाद इस समय देश के कई कोनो में पांव पसार चुका है। इससे अलग-अलग प्रदेश और राज्यों की पुलिस और अन्य फोर्स लड़ रही हैं। लेकिन आतंकवाद से लड़ाई की सबसे ज्यादा कीमत जम्मू-कश्मीर पुलिस ने चुकाई है। जम्मू-कश्मीर पुलिस इकलौती पुलिस है, जो तीन दशकों से फ्रंटफुट पर आकर यह लड़ाई लड़ रही है। वहीं जम्मू-कश्मीर पुलिस देश ही एक मात्र ऐसी फोर्स है, जहां आतंकवाद से लड़ने वाला विशेष दस्ता सबसे पहले तैयार हुआ था। यह दस्ता आज तक काम कर रहा है। 

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जानकारी के अनुसार 1989 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पनपा था, तब से ही पुलिस आतंकवाद से लड़ रही है। हालांकि, शुरुआत में दूसरी फोर्स इसका सामना करती थी, लेकिन 1994 में पुलिस को फ्रंटफुट पर आकर लड़ने के लिए कहा गया। अब तक आतंकवाद की लड़ाई में पुलिस के 1059 अफसर और कर्मी शहीद हो चुके हैं। 508 एसपीओ भी अपनी जान गवां चुके हैं।  

सबसे ज्यादा बहादुरी सम्मान पाने वाली पुलिस
वर्ष 2020 में पुलिस बहादुरी सम्मान के लिए कुल मिले अवॉर्ड में सबसे ज्यादा 90 फीसदी अवॉर्ड जम्मू-कश्मीर पुलिस को मिले हैं। पुलिस को 81 गैलेंटरी अवॉर्ड दिए गए हैं। जबकि सीआरपीएफ को 51 अवॉर्ड मिले थे। पिछले तीन वर्षों में हर बड़े ऑपरेशन में जम्मू कश्मीर पुलिस ने हिस्सा लिया है और आतंकवाद की कमर तोड़ी है। पुलिस प्रवक्ता मनोज शिरी का कहना है कि आतंकवाद के हर मोर्चे पर पुलिस आगे आकर लड़ती है। पुलिस के जवानों ने कभी पीठ नहीं दिखाई। 
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गोली सीने में लेकर जीता है जेके पुलिस का अफसर
जम्मू-कश्मीर पुलिस के हम जांबाज सिपाही निराले, पर्वत सी हिम्मत रखते हैं और फौलाद के जितना है दमखम। यह पंक्तियां जम्मू कश्मीर पुलिस की आधिकारिक मोबाइल कॉलर ट्यून है। यह जम्मू-कश्मीर पुलिस की वीरता का बखान करती है। जम्मू-कश्मीर पुलिस में एसएसपी के रूप में कार्यरत युगल मन्हास देश के इकलौते ऐसे पुलिस अफसर हैं, जिनके सीने में गोली दफन है। आतंकियों ने उनके परिवार पर हमला कर दिया था। इसमें गोली उनके सीने में लगी। पिछले 15 सालों से वह गोली सीने में लेकर नौकरी कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि गोली निकाली तो उनकी जान भी जा सकती है। लिहाजा वह गोली के साथ ही जी रहे हैं।

तीन साल में दो बड़े अफसरों को खोया
वर्ष 2017 में जम्म-कश्मीर पुलिस के अच्छाबल पुलिस स्टेशन के एसएचओ सब इंस्पेक्टर फिरोज अहमद की आतंकियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। अब आतंकियों ने इंस्पेक्टर मोहम्मद अशरफ की गोली मार कर हत्या कर दी। तीन सालों में सब इंस्पेक्टर रैंक के दो अफसरों की जान आतंकी हमले में गई है। इससे पहले एक एएसआई की हत्या भी हुई थी।

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