राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ राष्ट्रीय कश्मीरी हिंदू अधिवेशन संपन्न, ऐतिहासिक जम्मू डिक्लेरेशन पारित
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। यूथ फॉर पनुन कश्मीर (वाई4पीके) ने रविवार को अभिनव थियेटर जम्मू में राष्ट्रीय कश्मीरी हिंदू अधिवेशन करवाया। अधिवेशन मेंं जम्मू डिक्लेरेशन सर्वसम्मत से पारित किया गया और 1991 के मार्गदर्शन संकल्प की पुन: पुष्टि की गई।
घर वापसी और न्याय सहित अन्य मांगों को लेकर केंद्र सरकार को 19 जनवरी 2026 तक समय दिया गया। चेतावनी दी कि मांगों को पूरा न किया निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे। अधिवेशन में हिंदू राष्ट्र की हुंकार, पनुन कश्मीर हो साकार की गूंज सुनाई दी। इस अधिवेशन को हिंदू राष्ट्र की पहली आधारशिला मानने की मांग को दोहराया गया। देशभर से आए संत, विधिवेत्ता, विद्वान, युवा नेता और जनसंगठन एक मंच पर आए। सभी ने कश्मीरी हिंदू समुदाय के न्याय, गरिमा और सम्मानजनक पुनर्वास के लिए आवाज बुलंद की। 13 जुलाई 1931 को कश्मीरी हिंदू नरसंहार में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। पनुन कश्मीर के संयोजक डॉ. अग्निशेखर ने कहा कि पनुन कश्मीर के लिए दशकों से संघर्ष चल रहा है।
उन्होंने कहा कि 13 जुलाई 1931 में पहला नरसंहार हुआ था। महाराजा के खिलाफ विद्रोह में मारे गए लोगों को शहीद कहा जा रहा है, जबकि वे गद्दार थे। उन्होंने कहा कि पनुन कश्मीर कोई राजनीतिक सौदेबाजी नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और सभ्यतागत आवश्यकता है, जिसे पूरा करना हर भारतीय का कर्तव्य है। पनुन कश्मीर के लिए हम 36 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। हमारा मानना है कि कश्मीर से कश्मीरी हिंदू को निकालना भारत से हिंदुओं को निकालने जैसा है। ऐसे में पूरे भारत को एकसाथ खड़ा होकर कश्मीर में सांस्कृतिक, धार्मिक भारत की वापासी करनी होगी। सम्मेलन के प्रमुख सत्रों में पनुन कश्मीर: हिंदू राष्ट्र की नींव, हिंदू सभ्यतागत संघर्ष व उसका समाधान, जम्मू की क्षेत्रीय चुनौती और मातृभूमि की समन्वय नीति जैसे विषयों पर गंभीरता से मंथन किया गया। युवा उद्यमी संदीप कौल ने संस्कृति आधारित आर्थिक सशक्तिकरण मंच की घोषणा की। इसके साथ पनुन कश्मीर विद्यार्थी संगठन की शुरुआत कर युवाओं को आंदोलन से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम
उठाया गया। दिवंगत ओंकार नाथ रैना लोक सेवा सम्मान व स्वर्गीय सुरेश भान युवा आदर्श सम्मान के अंतर्गत 18 विभूतियों व संगठनों को समाज सेवा में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अधिवेशन में डॉ. अग्निशेखर, सद्गुरु डॉ. चरुदत्त पिंगले, स्वामी कुमार, रणजीत सावरकर, अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, डॉ. कुनराड, अर्जुन संपथ, प्रमोद मुतालिक, रमेश शिंद आदि मौजूद रहे।