फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महबूबा के बाद फारूक ने की पाकिस्तान से बात की वकालत, बजरंग दल की इस मांग पर बरसे अब्दुल्ला

Mon, 22 Feb 2021 04:20 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
विज्ञापन
फारूक अब्दुल्ला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

नेशनल कांफ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद की समाप्ति के लिए पाकिस्तान से बातचीत की वकालत की है। कहा कि दोस्ती ही इस क्षेत्र में विकास की चाबी है। भाजपा के आतंकवाद को खत्म करने के दावे के विपरीत अब भी आतंकवाद है। यदि हम चाहते हैं कि यह समाप्त हो तो हमें अपने पड़ोसी से बात करनी होगी। 

विज्ञापन


रघुनाथ बाजार में दौरे के दौरान उन्होंने पत्रकारों से कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कहते थे कि आप अपने दोस्त बदल सकते हैं पर पड़ोसी नहीं। इसलिए दोस्ती बढ़ाकर समृद्ध हों या फिर दुश्मनी जारी रखें जिसमें कोई समृद्धि नहीं है। कहा कि लद्दाख में चीन से संघर्ष के बाद सरकार ने जो रवैया अपनाया और सेना की वापसी शुरू की उसी प्रकार जम्मू-कश्मीर को आतंकवाद के दलदल से निकालने के भी प्रयास होने चाहिए। 

यह भी पढ़ें- तस्वीरेंः घाटी में रेल सेवा शुरू होने से लोगों में जबरदस्त उत्साह, पर्यटकों के लिए खुशी लेकर आई ट्रेन    
विज्ञापन


भारत-चीन बातचीत की सफलता पर कहा कि यह बड़ा मुद्दा है और एलएसी निर्धारित नहीं है। दो शक्तिशाली राष्ट्रों के बीच मतभेद रह सकते हैं। दोनों राष्ट्रों को बैठकर एलएसी का निर्धारण करना चाहिए ताकि हमेशा के लिए विवाद का समापन हो जाए।

यह भी पढ़ें- जांबाजी और जिंदादिली की मिसाल हैं अनंतनाग के अब्दुल्ला, एक हाथ से हौसलों को दी उड़ान

वहीं पेट्रोल कीमतों की वृद्धि पर कहा कि सरकार को इसकी समीक्षा करनी चाहिए। साथ ही कीमतों में बढ़ोतरी को वापस लेना चाहिए। फिरन पर प्रतिबंध लगाने संबंधी बजरंग दल की मांग पर कहा कि यह कश्मीर की पहचान है। यदि किसी ने इसका दुरुपयोग किया है तो इसे बदनाम नहीं किया जाना चाहिए।

Trending Videos
विज्ञापन

पूरे देश में परिसीमन होता तो खुशी-खुशी शामिल होती नेशनल कांफ्रेंस

परिसीमन आयोग की बैठक में शामिल न होने पर कहा कि पांच अगस्त 2019 को जो कुछ भी किया गया उसे हम स्वीकार नहीं करते हैं। यदि वह स्वीकार नहीं तो परिसीमन आयोग को कैसे स्वीकार किया जा सकता है। मुख्यमंत्री रहते उन्होंने 2026 तक परिसीमन स्थगित किया था तो आखिर क्या कारण है कि पूरे देश की बजाय कुछ राज्यों को इसके लिए चुना गया। यदि पूरे देश में परिसीमन होता तो नेशनल कांफ्रेंस खुशी-खुशी इसका हिस्सा बनती लेकिन जानबूझकर जम्मू-कश्मीर को चुना गया। इस वजह से वे साथ नहीं हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें