रियासत की बेपटरी शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाकर उसे देश का रोल मॉडल बनाया जाएगा। इसके साथ ही ऐसा माहौल बनाया जाएगा कि सरकारी स्कूल निजी स्कूलों का मुकाबला करते दिखें। लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने से कतराएं नहीं। यह सब होने में थोड़ा वक्त लगेगा, लेकिन सरकार इसके लिए कृतसंकल्पित है। यह कहना है रिसायत के शिक्षा मंत्री नईम अख्तर का। उनसे राज्य में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने तथा सरकार के कामकाज पर विस्तृत बातचीत हुई। पेश है बृजेश कुमार सिंह से बातचीत के अंश-
जम्मू में भी सुपर 50
जम्मू के सरकारी स्कूलों में भी अब सुपर 50 शुरू किया जाएगा। इसके तहत बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग दी जाएगी। यह व्यवस्था श्रीनगर में शुरू की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम मिले हैं। 50 विद्यार्थी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में चयनित हुए हैं। इनमें से 10 विद्यार्थी उधमपुर के हैं। यह योजना इस वजह से शुरू की गई है ताकि गरीब विद्यार्थी भी कोचिंग ले सकें। भारी भरकम फीस की वजह से वे कोचिंग नहीं ले पाते हैं। श्रीनगर के बेहतर अनुभव के आधार पर इसे जम्मू में भी शुरू करने का फैसला किया गया है।
मॉडल स्कूल के लिए विधायकों से मांगा सहयोग
सरकार की योजना है कि प्रत्येक जिले और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक मॉडल स्कूल हो। यहां लैब हों, स्मार्ट कक्षाएं हों, स्टाफ बेहतर हों, लाइब्रेरी हों। दोनों ही संभाग में यह व्यवस्था शुरू की गई है। जम्मू में 13 मॉडल स्कूल हैं। विधायकों से भी सहयोग मांगा गया है कि वे अपने विधायक निधि से इन स्कूलों के विकास के लिए पैसा दें। साथ ही स्थानीय फंड की भी व्यवस्था की जाएगी। कोशिश है कि ये मॉडल स्कूल किसी भी निजी स्कूल से किसी भी मामले में कम न हों।
रमसा में नए काम अगले साल से
रमसा के तहत पिछले दोे साल साल से जम्मू-कश्मीर को धेला भर भी नहीं मिला था। पिछली सरकार की ओर से इस दिशा में सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए। अब जाकर इस मुद्दे पर बात की गई और फंड जारी हो गया है। पहले चरण में रुके कार्यों पर इस साल 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। नए काम अगले साल से शुरू होंगे। इसके साथ ही 2009-10 में छात्राओं के लिए 68 हास्टल मंजूर किए गए थे। इन पर कोई काम नहीं हुआ था। अब जाकर इस पर काम शुरू किया गया है। इसके साथ ही 440 स्कूलों में कंप्यूटर लगाए जा रहे हैं, ताकि बच्चों को अत्याधुनिक शिक्षा की जानकारी मिल सके।
नेकां सरकार में खुल गई थी ट्रांसफर इंडस्ट्री
पिछली नेकां सरकार में शिक्षकों के तबादले को लेकर ट्रांसफर इंडस्ट्री खुल गई थी। कोई भी तबादला बिना पैसा के नहीं होता था। केवल तबादले पर ही ध्यान दिया गया। यही वजह है कि रियासत में 120 मॉडल स्कूल बनने थे। प्रत्येक ब्लाक में इस पर 3-4 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे, लेकिन इस दिशा में प्रयास न होने से यह योजना ही बंद कर दी गई। इससे रियासत को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
दो इवनिंग वीमेंस नर्सिंग कालेज शीघ्र
महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। श्रीनगर और जम्मू में दो इवनिंग वीमेंस नर्सिंग कालेज इसी सत्र से शुरू किए जाएंगे। इनमें अध्यापन कार्य शाम तीन बजे के बाद होगा। कोशिश होगी कि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को इस क्षेत्र में प्रशिक्षित कर उन्हें पैरों पर खड़ा किया जा सके। इसके साथ ही विभिन्न कालेजों में वोकेशनल तथा स्किल डेवलपमेंट पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।
क्लस्टर यूनिवर्सिटी पर काम शुरू
सरकार ने उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर यूनिवर्सिटी की योजना शुरू की है। इसके तहत जम्मू और श्रीनगर दोनों स्थानों पर काम शुरू हो गया है। इससे पांच-पांच कालेज जुड़ेंगे। कश्मीर विश्वविद्यालय में इवनिंग कक्षाएं शुरू कर दी गई हैं। कोशिश है कि यह जम्मू विश्वविद्यालय में भी चलें। जम्मू और श्रीनगर के लिए दो नए इंजीनियरिंग कालेज भी खोले जा रहे हैं।
नीट पर घबराने की जरूरत नहीं
नीट पर रियासत के बच्चों को घबराने की जरूरत नहीं है। इससे उनका हित कतई प्रभावित नहीं होगा। वर्ष 1964 से ही यहां एमसीआई के नियम कानून लागू हैं। नीट में केवल परीक्षा ही राष्ट्रीय स्तर पर होगी, लेकिन मेरिट राज्य स्तर पर बनेगी। दाखिला जम्मू-कश्मीर के रहने वाले बच्चों को ही मिलेगा। इस वजह से पहले की ही तरह दाखिला होगा। इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं है। इस बार नीट को लेकर थोड़ी भ्रम की स्थिति रही। मेडिकल दाखिला लेने वाले छात्र बीओपीईई की वेबसाइट लगातार देखते रहे ताकि इस संबंध में जो भी अपडेट हो उन्हें मिल जाए।
निकाय-पंचायत चुनाव इसी साल
रियासत में निकाय और पंचायत चुनाव इसी साल कराए जाएंगे। सरकार की मंशा बिल्कुल साफ है। वह चाहती है कि अंतिम स्तर तक लोकतंत्र मजबूत हो। निकाय चुनाव नहीं होने की वजह से रियासत को होने वाले नुकसान की भी उसे जानकारी है। कुछ परिस्थितियां ऐसी बनीं जिसकी वजह से फिलहाल चुनाव नहीं हो पाया। पंचायत चुनाव में देरी होने की स्थिति पर कहा कि अभी तो पंचायतों का कार्यकाल है। पहले उसे पूरा तो हो लेने दीजिए।
विपक्ष अनावश्यक रूप से मुद्दे को उछाल रहा
विपक्ष अनावश्यक रूप से मुद्दों को उछाल रहा है। दरअसल उसके पास कोई मुद्दा ही नहीं है। इस वजह से कभी सैनिक कालोनी तो कभी कश्मीरी पंडितों की कालोनी पर शोर शराबा किया जाता है। विपक्ष लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा कर मौके का लाभ उठाना चाहता है। हालांकि, सरकार इससे तनिक भी चिंतित नहीं है। विपक्ष का काम ही सरकार के कामों का विरोध करना है, लेकिन इसमें मुद्दे के आधार पर विरोध हो तो जायज है।