जम्मू। नई फसल आने और बाजार में मांग कमजोर पड़ने के बावजूद सरसों तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। 10 दिन में थोक बाजार में भाव औसतन 15 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं। कारोबारियों का कहना है कि विदेशी सप्लाई पर दबाव, बड़े कारोबारियों की स्टॉकिंग और मुनाफाखोरी के कारण बाजार में तेजी बनी हुई है।
कारोबारियों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कम तेल इस्तेमाल की अपील के बाद खपत घटी है। पहले जहां ग्राहक महीने भर का तेल साथ खरीद लेते थे वहीं अब जरूरत के हिसाब से ही तेल खरीद रहे हैं। अप्रैल और मई में सरसों की नई फसल आने के बाद तेल के दाम नरम पड़ जाते थे। इस बार बाजार की चाल बदली है। मई में ही भाव चढ़ने लगे हैं।
तेल कारोबारी अभिमन्यु गुप्ता ने बताया कि प्रमुख ब्रांडों का सरसों तेल 175 से 190 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है। कुछ समय पहले तक 15 रुपये सस्ता था। जम्मू-कश्मीर में हर महीने करीब 1000 टन खाद्य तेल की सप्लाई आती है लेकिन इस बार बड़े होलसेलर और मिलर माल रोककर बैठे हैं। अगर यही स्थिति बनी रही तो दिवाली तक सरसों तेल 210 रुपये प्रति लीटर पार पहुंच सकता है। देसी घी और रिफाइंड तेल के दाम में ज्यादा बदलाव नहीं आया है।
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बड़ी कंपनियां उठा रहीं फायदा
कारोबारी संदीप जैन ने बताया कि पश्चिम एशिया के तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उठापटक के कारण सोया और पाम तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। सरसों तेल पर दबाव बढ़ गया है। दुकानदारों के लिए पुराना स्टॉक निकालना मुश्किल हो रहा है क्योंकि ग्राहक पहले की तुलना में कम खरीदारी कर रहे हैं। कारोबारी अतुल गुप्ता ने बढ़ती कीमतों के पीछे मुनाफाखोरी को वजह बताया। उनका दावा है कि बड़ी कंपनियां हालात का फायदा उठा रहे हैं। सरकार ने स्टॉक नियंत्रण को लेकर नियम बनाए थे लेकिन उनका सख्ती से पालन नहीं हो रहा।