अरनिया। करीब पांच माह से नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी पर बना गतिरोध कोर्ट का फैसला आने के बाद दूर हो गया। अब विपक्ष अगले साल अविश्वास प्रस्ताव ला सकेगा।
उल्लेखनीय है कि विपक्ष के सात पार्षदों की तरफ से लाये गए अविश्वास प्रस्ताव के कारण अल्पमत में चल रही अरनिया नगर पालिका का मामला कोर्ट में चल रहा था। इसकी पहली सुनवाई 19 जुलाई को हुई। न्यायालय ने अगली सुनवाई दो अगस्त मुकर्रर की। सोमवार को नगर पालिका अध्यक्ष रमेश सैनी ने बताया कि कोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में आया है। कोर्ट ने फैसले में साफ किया है कि नियम के अनुसार साल में मात्र एक बार ही विपक्ष अविश्वास पत्र ला सकता है, जबकि यह एक ही साल में दो बार लाया गया है, जो मान्य नहीं है। इसीलिए यह कोर्ट मौजूदा अध्यक्ष के पक्ष में फैसला सुनाती है।
अध्यक्ष के अनुसार पहला अविश्वास प्रस्ताव इसी साल मार्च में लाया गया था। मगर अप्रैल माह ही विपक्षी के कुछ पार्षदों ने फिर से अपना बहुमत मेरे पक्ष में दे दिया, जिससे बहुमत का आंकड़ा पूरा हो गया, जबकि 27 अप्रैल को ही विपक्ष के सात पार्षदों ने फिर से बहुमत वापस लेकर नगर पालिका को अल्पमत में खड़ा कर दिया। इससे कोर्ट की तरफ से सोमवार को सुनवाई के दौरान मेरे पक्ष में फैसला सुनाया गया है।
एक निर्दलीय एमएल राव नामक विपक्ष के पार्षद ने बताया कि अभी मैं पार्टी (भाजपा) कार्यालय में चल रही मीटिंग में हूं, जिससे मुझे अभी तक आज के फैसले के बारे में कुछ पता नहीं है।
बताते चलें कि अल्पमत में चल रही नगर पालिका में मात्र भाजपा के छह ही पार्षद थे, जबकि पूर्ण बहुमत का आंकड़ा सात था। इसके अलावा विपक्ष में एक कांग्रेस, दो भाजपा व चार निर्दलीय पार्षद हैं, जिन्होंने फिर से 27 अप्रैल को बहुमत वापस लेकर नगर पालिका को अल्पमत में ला दिया था।