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पानी का बुलबुला साबित होगा भाजपा का गुस्सा

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भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार के पहले दस दिन बयानों की धुआंधार आतिशबाजी में खर्च हो जाने के बाद अब मुफ्ती सरकार एक्टिव मोड में आने के लिए गियर बदलने वाली है। भाजपा की नाराजगी पानी के बुलबुले की तरह खत्म होने के पूरे-पूरे आसार हैं।
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भाजपा आलाकमान ने उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह को दिल्ली बुलाकर उन्हें आगे की रणनीति समझाई है। बुधवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है। इसमें बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण को अंतिम रूप दिया जाएगा। मुफ्ती निजाम को भी अपने माफिक फेंटेंगे।

हालांकि, राज्यपाल शासन के दौरान भी अफसरों की तैनाती में भारी-भरकम उलटफेर हो चुका है, लेकिन इसमें अभी और फेरबदल होना है। पसंदीदा अफसरों की फेहरिस्त तैयार है। रविवार 22 मार्च को पेश होने वाले बजट की तैयारी भी जोर-शोर से चल रही है।
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वित्त मंत्री हसीब द्राबू की पूरी कोशिश यह जताने की होगी कि बजट गठबंधन एजेंडा के तहत ही तैयार हुआ है। खजाना खाली होने का ढोल पीडीपी शुरू से ही पीट रही है, ऐसे में किसी क्रांतिकारी घोषणा की उम्मीद कम ही है।
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पहले दस दिन बयानों की धुआंधार आतिशबाजी

पिछले दस दिनों में जो घमासान चला उसमें मुख्यत: तीन मुद्दे हावी रहे। एक, शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मुफ्ती द्वारा चुनाव के लिए पाक को श्रेय देना, दूसरा अफजल गुरु और तीसरा मसर्रत की रिहाई। अपने बयान पर मुफ्ती कायम हैं।

भाजपा ने इस बयान से खुद को अलग करने के अलावा और कोई सख्त कदम नहीं उठाया है। अफजल पर पीडीपी ने पुराना स्टैंड ही दोहराया है। मसर्रत के बारे में वह यह जता रही है कि यह फैसला तो राज्यपाल शासन में ही ले लिया गया था।

यानी अब गठबंधन में रार का कोई कारण ही नहीं बचा। एक मुद्दा भाजपा के मंत्रियों को उनके पसंदीदा महकमे न मिलना भी है। मुफ्ती बड़े सयाने राजनेता है। वे महकमों में फेरबदल कर अपने वजीरों को तसल्ली करने की नसीहत देकर एक-दो भाजपाई मंत्रियों का कद बढ़ा सकते हैं।

भाजपा कोटे से कोई नया मंत्री भी बन सकता है। यह भी संभव है कि काबीना में कद तो बढ़ जाए फिर भी भाजपा के मंत्रियों को मलाईदार कहे जाने वाले महकमे न मिलें। अलबत्ता, बजट सत्र में गठबंधन के दोनों साथी कंधे से कंधा मिलाए नजर आएंगे
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