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मुफ्ती बम से सड़क से लेकर संसद तक हंगामा

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रियासत में नौ दिन पुरानी पीडीपी-भाजपा गठजोड़ सरकार के मुखिया मुफ्ती मोहम्मद सईद के सियासी बम से भूचाल उठ खड़ा हुआ है। विपक्ष के निशाने पर भाजपा है। सड़क से लेकर संसद तक हंगामा मचा है। अलगाववादी मसर्रत आलम की रिहाई पर पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
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पीडीपी के कदम से भाजपा को अपनी जमीन दरकती नजर आने लगी है। भाजपा ने डैमेज कंट्रोल तथा फेस सेविंग की मुहिम भी शुरू कर दी है। इसी के तहत सोमवार को भाजपा विधायकों के  प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर फैसले पर आपत्ति जताई, ताकि भविष्य में कोई फैसला एकतरफा न लिया जा सके।

सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री की ओर से फैसले लेने में भाजपा को विश्वास में न लिए जाने से पार्टी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। भाजपा ने मिशन कश्मीर के तहत पहली बार सत्ता में आने का फैसला किया था, लेकिन जिस प्रकार से गठजोड़ सरकार का संदेश रियासत तथा देशभर में जाना चाहिए था, वह दांव पार्टी को उलटा पड़ता नजर आने लगा है।
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सत्ता का पार्टी के लिए कोई मायने नहीं

भाजपा सूत्रों का कहना है कि यदि इसी प्रकार चलता रहा तो पूरे देश में भाजपा को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। सूत्रों का कहना है कि यदि मसर्रत की रिहाई का मामला अधिक तूल पकड़ा तो इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ सकती है।

इसलिए घाटी सहित जम्मू संभाग में अधिक सतर्कता बरतने को कहा गया है। हालांकि, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जुगल किशोर शर्मा का कहना है कि पीडीपी को साफ संदेश दे दिया गया है कि सत्ता का पार्टी के लिए कोई मायने नहीं है।

लेकिन वह रियासत तथा देश की अखंडता एवं एकता से खिलवाड़ नहीं होने देगी। पीडीपी के प्रवक्ता नईम अख्तर का कहना है कि बेवजह हंगामा किया जा रहा है। रियासत में शांति बहाली की दिशा में मसर्रत की रिहाई को देखा जाना चाहिए।
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