केंद्र सरकार के माइक्रो, स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज (एमएसएमई) मंत्रालय की ओर से देशभर में युवाओं को अपना कारोबारी साम्राज्य स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्रालय का जम्मू स्थित कार्यालय भी इस क्रम में लगातार प्रयासरत है, लेकिन अन्य राज्यों के मुकाबले जम्मू-कश्मीर के युवाओं में मंत्रालय की योजनाओं के प्रति रुझान कम है। कई योजनाओं में सौ फीसदी तक सब्सिडी है, लेकिन युवाओं को इसकी जानकारी तक नहीं है। एमएसएमई के निदेशक (जेएंडके) वरिंदर शर्मा से विभिन्न पहलुओं पर भूपेंदर सिंह भाटिया की बातचीत में मुख्य अंश...
सौ फीसदी तक होती है सब्सिडी
देशभर में बेरोजगारों की संख्या के अनुपात में नौकरियां नहीं हैं। इसलिए एमएसएमई मंत्रालय की ओर से युवाओं को अपना कारोबार स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। युवा वर्ग एमएसएमई कार्यालय आकर तमाम योजनाओं की जानकारी हासिल कर सकता है। इनमें सैकड़ों ऐसी योजनाएं हैं, जिसमें सौ फीसदी तक सब्सिडी का प्रावधान है। लेकिन जम्मू का युवा वर्ग इसे हासिल करने के लिए आगे नहीं आ रहा है। विभाग की ओर से युवाओं को जानकारी देने के लिए समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। बड़ी संख्या में युवा स्किल वाले कोर्स तो करते हैं, लेकिन उसका लाभ कैसे उठाना है, उन्हें नहीं पता। युवाओं को एमएसएमई में संपर्क कर खुद का कारोबार शुरू करने के लिए कदम उठाने चाहिए। जबकि अन्य राज्यों में युवा एमएसएमई का पूरा लाभ उठा रहे हैं। युवाओं में स्किल होना चाहिए। आने वाले समय में बाहरी उद्योग रियासत का रुख करेंगे तो स्किल लोगों की जरूरत पड़ेगी।
कलस्टर डेवलपमेंट स्कीम के लिए ग्रुप नहीं
एमएसएमई की कलस्टर डेवलपमेंट स्कीम देशभर में काफी लोकप्रिय है। इसके तहत एक ही उद्योग से जुड़े 8-10 उद्यमियों का कलस्टर बनाकर एमएसएमई की ओर से उन्हें तमाम सुविधाएं और मशीनरी मुहैया करवाई जाती है। लेकिन जम्मू कश्मीर में कलस्टर उद्योग के लिए ग्रुप आगे नहीं आ रहे। अवंतीपोरा में बैट उद्योग का एक कलस्टर बनाया गया है। जिसमें बैट की लकड़ी सूखाने के लिए पहले 15 दिन लगते थे, लेकिन अब कलस्टर में यह काम 15 मिनट में होता है। इन कलस्टर के लिए सरकार की ओर से जमीन मुहैया नहीं होना भी एक कारण है। जम्मू में ऐसा कोई कलस्टर नहीं है। राइस मिलर का एक ग्रुप आगे आया था, लेकिन योजना फलीभूत होने से पहले उसने कदम पीछे खींच लिए।
छोटे उद्यमियों को भी भेजते हैं बाहर
उद्यमियों को एक्सपोजर और मार्केटिंग की सुविधा देने के उद्देश्य से एमएसएमई की ओर से समय-समय पर देश और विदेशों के टूर करवाए जाते हैं। यह काम उद्योग एसोसिएशन के मार्फत होता है। बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के मार्फत उद्यमियों को कई बार विदेश भेजा गया है। जहां तक छोटे उद्यमियों की बात है, वह एसोसिएशन के मार्फत एमएसएमई से संपर्क करें। उन्हें बाहर प्रदर्शनियों में भेजने के अलावा 50 फीसदी दर पर स्टाल भी उपलब्ध करवाए जाते हैं। व्यक्तिगत तौर पर उन्हीं उद्यमियों को भेजा जाता है, जो डीआईसी से रजिस्टर्ड हैं। ऐसे उद्यमियों को साल में एक बार बाहर भेजा जाता है। उनके विमान पर आने-जाने के टिकट सहित सवा लाख रुपये तक का खर्च किया जाता है।
उद्यमियों के लिए उद्योग आधार मेमोरेंडम
उद्योगों को अब अपने रजिस्ट्रेशन के लिए डीआईसी जाने की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार ने उद्योग आधार मेमोरेंडम लांच किया है, जिसके तहत उद्यमी आनलाइन सारी औपचारिकताएं घर बैठे पूरी कर सकते हैं। इसमें एकबार रजिस्टर्ड होने के बाद सब जगह यही रजिस्ट्रेशन मान्य होगा। इसके अलावा एमएसएमई की ओर से तमाम कार्यवाही को आसान और आनलाइन बनाया जा रहा है, ताकि उद्यमियों को किसी तरह की परेशानी न हो।