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बाढ़ से अब तक बचाए गए सवा दो लाख लोग

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राजोरी पुंछ के साथ जम्मू को कश्मीर घाटी से जोड़ने वाली मुगल रोड को सोमवार से वाहनों के लिए खोल दिया गया है। यह रोड पिछले 12 दिनों से बंद था।
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मुगल रोड कंस्ट्रक्शन डिवीजन के एईई मिर्जा ने बताया कि बाढ़ और मूसलाधार बारिश से मुगल रोड पर पड़ी पस्सियां हटा दी गई हैं। सोमवार से मुगल रोड से वाहनों का आना जाना शुरू हो गया है।

अब भी हालांकि कुछ स्थानों पर पस्सियां हटाने का कार्य चल रहा है, लेकिन यातायात बहाल करने योग्य सड़क बन गई है। राजोरी से शोपिया और उधर से भी वाहन आ-जा रहे हैं।
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बाढ़ का पानी निकालने के ल‌िए लगाए पंप

रियासत की कैबिनेट ने बाढ़ की स्थिति की समीक्षा कर 18 सितंबर से सचिवालय का कामकाज शुरू करने का निर्णय लिया है। राहत कार्य तेज करने के लिए कर्मचारियों के शनिवार और रविवार के अवकाश भी रद्द कर दिए हैं।

श्रीनगर समेत तमाम बाढ़ पीड़ित इलाकों में पानी घट रहा है। जमे पानी को निकालने के लिए श्रीनगर में तीस से अधिक पंप लगाए गए हैं। इस कवायद के बावजूद पानी को पूरी तरह निकालने में काफी वक्त लग सकता है।

इस बीच सेना और एनडीआरएफ ने लगभग 2 लाख 27 हजार से अधिक लोगों को पीड़ित इलाकों से सुरक्षित बाहर निकाला है। मलबों से शवों का मिलना जारी है।

मलबे से लगातार निकल रहे शव

रामनगर तहसील के डुडू इलाके में सोमवार की सुबह कच्चा मकान गिरने से प्रेमू नामक एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। पंचैरी के सद्दल गांव में भी सर्च अभियान के दौरान मलबे से एक किशोर का शव बरामद हुआ।

नौशेरा स्थित तराड़ नाले से दो और लोगों के शव बरामद हुए। माना जा रहा है कि ये शव बारात वाली बस में सवार यात्रियों के हैं।

अब तक इस इस हादसे में 49 शव मिल चुके हैं। इस बीच, मुगल रोड चालू हो गया है, लेकिन जम्मू-श्रीनगर हाईवे अब तक बंद है।

राहत कार्य में लगे सेना के तीस हजार जवान

सोमवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पुंछ इलाके में बाढ़ पीड़ित इलाकों का सर्वे कर हालात का जायजा लिया है। सेना के प्रवक्ता कर्नल एस डी गोस्वामी के मुताबिक बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में अकेले सेना ने एक लाख चालीस हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है।

बीएसएनएल की सेवा दुरुस्त करने के लिए श्रीनगर में संचार उपकरण पहुंचा दिए गए हैं। केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय, रेड क्रास, पंजाब और झारखंड सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए 33 हजार कंबल प्रभावित इलाकों में पहुंचाए गए।

इससे पहले 8200 कंबल बांटे गए थे। बाढ़ पीड़ितों को 1572 टेंट भी उपलब्ध कराए गए हैं। सेना की 80 मेडिकल टीमें पीड़ित इलाकों में काम कर रही हैं। आपरेशन मेघ राहत में 30 हजार से अधिक जवान जुटे हैं।
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सेना नहीं कर रही किसी तरह का भेदभाव

सेना में बचाव कार्य में भेदभाव बरते जाने के आरोपों का खारिज कर दिया है। बचाव और राहत कार्य में पर्यटकों और बाहरी राज्यों के लोगों को प्राथमिकता दिए जाने के आरोप कुछ लोगों द्वारा लगाए गए थे।

नार्दन कमांड के प्रवक्ता ने कहा है कि सेना ने संकल्प लेकर सब को समान तरीके से मदद पहुंचाने की कोशिश की है। सेना में नि:स्वार्थ सेवा की उच्च परंपरा रही है और उसका पालन किया जा रहा है।

सेना के जवानों ने बिना थके विपरीत परिस्थितियों में काम जारी रखा है। हेलीकाप्टर के अलावा नाव से भी राहत पहुंचाई जा रही है।
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