यह महज संयोग नहीं है कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के तुंरत बाद यूनिफाइड कमांड की बैठक की जरुरत महसूस की। इस पहल को सेना और सुरक्षा बलों और रियासत सरकार के बीच कुछ मुद्दों पर पैदा हुए विवाद को सुलझाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
दिल्ली से लौटते ही महबूबा अमन बहाली के लिए जिस रूप में सक्रिय हुईं हैं उससे केंद्र द्वारा मिली मोहलत से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हिंसा के मौजूदा हालात में दो-तीन महीने में स्थिति सामान्य बनाना आसान नहीं दिखता लिहाजा इसके लिए पीडीपी अलगाववादी शरणम गच्छामि की नीति पर अमल चाहती है। इसके लिए वह केंद्र पर दबाव बना रही है। उधर केंद्र ने दो टूक संदेश दे दिया है कि संविधान के दायरे से बाहर कोई बातचीत संभव नहीं है।
रियासत सरकार अमन बहाली में अलगाववादियों से मदद मांग रही है लेकिन अलगाववादियों की जमात ने इसे अनसुना कर दिया है। उपद्रवी और आतंकी संगठनों में मजबूत गठजोड़ कायम होने से स्थिति ज्यादा बिगड़ी है। पीडीपी सूत्रों के मुताबिक पत्थरबाज को जीप की बोनट पर बांधकर घुमाने का वीडियो वायरल होने के कारण ही पीडीपी पर कश्मीर केंद्रित पार्टियों का हमला बढ़ा।
इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों से लेकर ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर तक पीडीपी नेताओं पर खतरा भी बढ़ा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने डीजीपी को फोन कर सेना पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। सेना और सुरक्षा बलों ने इसे आतंक विरोधी कार्रवाई में रियासत सरकार का हस्तक्षेप माना। इस कारण विवाद की स्थिति पैदा हुई। जम्मू कश्मीर में अफस्पा के तहत सेना को विशेष अधिकार मिले हुए हैं।