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पीएम मोदी की की श्रीनगर में रैली आज

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दिवाली से ठीक पहले शनिवार को रियासत के एक दिन के दौरे पर आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोगों को बड़े तोहफों की उम्मीद है। सनद रहे कि पिछली दिवाली भी प्रधानमंत्री ने बाढ़ से तबाह हुए कश्मीर में मनाई थी।
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मोदी के मिशन कश्मीर में बिजली और पर्यटन के जरिए राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की कार्ययोजना शामिल है। मोदी का दौरा इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

दौरे के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी की साजिश को नाकाम करने के लिए सुरक्षा के जबरदस्त इंतजाम किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह साढ़े 11 बजे श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में रैली को संबोधित करेंगे।
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रैली में मोदी लगभग एक लाख करोड़ के मेगा पैकेज का एलान कर सकते हैं। इसमें वर्षों से लंबित रिफ्यूजियों का भी पैकेज शामिल है। इसके बाद वे रामबन जिले के चंद्रकोट में चिनाब नदी पर बगलिहार द्वितीय बिजली प्रोजेक्ट का लोकार्पण करेंगे।

इसके साथ ही उधमपुर-बनिहाल फोर लेन सड़क मार्ग के काम का भी शुभारंभ करेंगे। इस दौरान केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल भी रहेंगे।

पहली बार आ रहे हैं मोदी

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह शुक्रवार को ही पहुंच चुके हैं। रियासत में गठबंधन सरकार बनने के बाद मोदी पहली बार श्रीनगर आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद तथा उप मुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह का मानना है कि पीएम के दौरे से रियासत में विकास को नई गति मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीनगर में पहली बार पीडीपी-भाजपा की संयुक्त रैली कर कश्मीरियों का विश्वास जीतने की कोशिश करेंगे।

इसमें उनका ज्यादा ध्यान बेरोजगारों तथा भटके हुए युवाओं पर होगा। इसका संकेत भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने अपने पिछले दौरे में दिया था।

मोदी पर्यटन तथा पनबिजली परियोजनाओं के माध्यम से रियासत की तकदीर को बदलने में सबसे सहयोग मांग सकते हैं। रियासत के सुदूर इलाकों तक सड़क तथा रेल कनेक्टिविटी की दिशा में भी कुछ घोषणाएं संभव हैं।

भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले सीमांत लोगों को भी उम्मीद है कि मोदी उनके लिए  पैकेज का एलान कर सकते हैं।
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किशनगंगा प्रोजेक्ट में देरी से प्रधानमंत्री नाखुश

जम्मू-कश्मीर दौरे से ऐन पहले मोदी ने राज्य के बिजली प्रोजेक्टों की स्थिति की समीक्षा की है। इस समीक्षा में प्रोजेक्टों के निर्माण में विलंब का मामला सामने आया।

किशनगंगा प्रोजेक्ट के निर्माण में हो रही देरी पर पीएम ने नाराजगी भी जताई। जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में झेलम की सहयोगी नदी किशनगंगा पर प्रस्तावित इस प्रोजेक्ट पर 5498 करोड़ रुपये खर्च होने हैं।

प्रोजेक्ट को 2009 में स्वीकृति दी गई थी और इसे इस साल पूरा हो जाना चाहिए था। प्रोजेक्ट एक साल के विलंब का शिकार हो गया है और अब इसके नवंबर 2016 में पूरा होने की संभावना है।

किशनगंगा प्रोजेक्ट के तहत नदी के पानी को डायवर्ट कर गुरेज घाटी से बांदीपोरा के पास भूमिगत पावर हाउस में लाया जाना है। 330 मेगावाट के इस प्रोजेक्ट में इस्तेमाल के बाद पानी वुलर लेक में आएगा।

इस प्रोजेक्ट से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़ और उत्तराखंड को बिजली मिलेगी। इसलिए मोदी इस प्रोजेक्ट के प्रति गंभीर हैं। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर सरकार के बीच तालमेल का अभाव और प्रोजेक्ट से विस्थापित लोगों के पुनर्वास का मसला लंबित रहने के कारण प्रोजेक्ट में देरी हुई है।

पीएम ने इसे दूर करने के निर्देश दिए हैं। मोदी जिस बगलिहार द्वितीय प्रोजेक्ट को कश्मीर की जनता को समर्पित करेंगे, उसके प्रथम चरण में 450 मेगावाट का उत्पादन हो रहा है।

अब नए प्रोजेक्ट से भी इतना ही उत्पादन होगा। इस तरह बगलिहार प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर के बिजली उत्पादन क्षमता में कुल 900 मेगावाट का योगदान कर सकेगा।

इसकी बिजली से रियासत को प्रतिदिन लगभग सात करोड़ की आमदनी संभव है। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर को हर साल तीन से चार हजार करोड़ रुपये की बिजली खरीदनी पड़ती है।
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