पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के विधान परिषद के सदस्य विक्रमादित्य सिंह ने रविवार को पार्टी और एमएलसी पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। विक्रमादित्य के पीडीपी से इस्तीफे से जम्मू संभाग में जनाधार बढ़ाने की पीडीपी की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। जम्मू में पत्रकार वार्ता में महाराजा हरि सिंह के पौत्र एवं कांग्रेस के राज्यसभा के सांसद डा. कर्ण सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह ने पीडीपी से इस्तीफा देते हुए मुख्यमंत्री एवं पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निमंत्रण पर वह पीडीपी में शामिल हुए। मुफ्ती सईद लोगों को जोड़ना जानते थे लेकिन उनकी मृत्यु के बाद अरमान टूट रहे है। विक्रमादित्य सिंह ने कहा राज्य खासतौर से जम्मू क्षेत्र के बारे में सार्वजनिक रूप से व्यक्त किए उन्हें बयान व मुद्दों को पार्टी ने अस्वीकार कर दिया। मुद्दों में अवैध रूप से जम्मू में बसे रोहिंग्याओं को उनके देश वापिस भेजा जाना, स्कूली पाठ्य पुस्तकों में डोगरा शासन की अवधि को शामिल करने और महाराजा हरि सिंह की जयंती पर सार्वजनिक छुट्टी की मांग मुख्य रूप से शामिल रही।
उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे जम्मू क्षेत्र के लोगों की भावनाओं को दृढ़ता से प्रतिबिम्बित करते है। पीडीपी जम्मू क्षेत्र के लोगों की मांगों और अरमानों का लगातार तिरस्कार कर रही है। ऐसे में पीडीपी में बने रहना अब उनके लिए संभव नहीं है। पीडीपी के संरक्षक एवं पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की राज्य के तीनों क्षेत्रों के बीच बढ़ती दूरी मिटाने की परिकल्पना भी अधूरी रही है। ऐसे में न तो नैतिक रूप से और न ही वैचारिक दृष्टि से मेरे लिए पीडीपी और विधान परिषद में उसका सदस्य बने रहना उचित होगा। पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती तत्काल प्रभाव से इस्तीफा स्वीकार करें। विधान परिषद के चेयरमैन को एमएलसी पद का इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध करूंगा।