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मिशन 44 के लिए भाजपा की नेकां और पीडीपी में सेंध

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भाजपा ने मिशन 44 के तहत कश्मीर और लद्दाख की सीटों की लिए व्यूह रचना शुरू कर दी है। लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित भाजपा रियासत में अपने बूते सरकार बनाने की कोशिशों में जुटी है।
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हालांकि जम्मू कश्मीर में मुस्लिम वोट बैंक के प्रभाव के कारण भाजपा के इस सपने की राह में कई अड़चनें हैं लेकिन पार्टी को लगता है कि कश्मीर में नेकां और पीडीपी के असंतुष्टों पर डोरे डालकर वह घाटी में खाता खोल सकती है।

इस रणनीति पर अमल करते हुए नेकां के कुछ नेताओं को पार्टी में लाने के बाद भाजपा उत्साहित है। पीडीपी के भी कई असंतुष्ट भाजपा के संपर्क में हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा को जम्मू संभाग की दोनों सीटों के अलावा लद्दाख की इकलौती सीट भी हासिल हुई थी।
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जम्मू संभाग की 37 सीटों पर है फोकस

जम्मू संभाग में विधानसभा की 37 सीटें हैं। इनमें से शत-प्रतिशत पर कब्जा भाजपा के लिए संभव नहीं दिखता। कांग्रेस की कुछ सीटों पर अच्छी पकड़ है। इसके अलावा नेकां और पीडीपी भी कुछ सीटों पर दमदार मौजूदगी दर्ज कराती रही हैं।

पिछले चुनाव में अमरनाथ भूमि आंदोलन की पृष्ठभूमि में भाजपा ने 11 सीटें हासिल की थीं। विधानसभा चुनाव में समीकरण बदल रहे हैं। इस बार नरेंद्र मोदी की लहर फिलहाल महसूस नहीं हो रही है। लिहाजा पार्टी को लोकसभा चुनाव जैसा प्रदर्शन करने को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।

पार्टी ने महासचिव जेपी नड्डा को मिशन कश्मीर पर लगाया है। अब तक भाजपा कश्मीर में एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी है। इस बार नेकां के पूर्व विधायक मोहम्मद शफी भट्ट की पुत्री हीना भट्ट को भाजपा ने अपने खेमे में करने में सफलता पाई है।

फारुख खान और हीना भट्ट हैं मुस्लिम चेहरे

मोहम्मद शफी भट्ट अमीराकदल से विधायक थे लेकिन नेकां ने 2008 में उन्हें टिकट नहीं दिया था। हीना दांतों की डाक्टर हैं। उन्हें लगता है कि मोदी का विजन कश्मीर समस्या को सुलझा सकता है।

इससे पहले पूर्व आईजी फारूक खान भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इस तरह जम्मू कश्मीर में भाजपा के पास अब मुस्लिम चेहरा भी है। लोकसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है।

जम्मू कश्मीर में पार्टी को 32.4 प्रतिशत वोट मिले और तीन सीटें भी हासिल हुईं। इसके अलावा 87 में से 41 विधानसभा सीटों पर उसे बढ़त मिली। इस आंकड़े ने भाजपा के मंसूबे बुलंद किए। कांग्रेस को 22.9, नेकां को 20.5 और पीडीपी को 11.1 प्रतिशत वोट हासिल हुए।
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इसलिए भी फायदे की उम्मीद

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस अलग-अलग चुनाव लड़ेगी। पीडीपी भी किसी गठबंधन में नहीं है। नतीजतन वोटों का बिखराव तय है। मुस्लिम वोट बैंक नेकां, पीडीपी और कांग्रेस में बंट सकता है।

ऐसी स्थिति में भाजपा को जम्मू संभाग में फायदा मिल सकता है। घाटी में प्रभावशाली चेहरे कुछ सीटों पर भाजपा के लिए खाता खुलने की जुगाड़ कर सकते हैं।

लद्दाख में नेकां और कांग्रेस में वोटों का बिखराव भी भाजपा को अपने पक्ष में लगता है।
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