छह दिन पहले जम्मू से लापता होने वाले तीन स्कूली बच्चों को आखिरकार पुलिस लेकर शहर लौट आई। जम्मू से फरार होने से पहले तीनों बच्चों ने रेलवे स्टेशन से कोलकाता के लिए टिकट कटवाई थी, लेकिन रास्ते से अचानक ट्रेन बदल देहरादून पहुंच गए।
एसपी (नार्थ) एसकेएस चौहान ने बताया कि बच्चों के लिए जम्मू रेलवे से निकलने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने दिल्ली रेलवे स्टेशन को अलर्ट कर दिया था, लेकिन बच्चों ने कोलकाता की ट्रेन पकड़ ली थी। दिल्ली पुलिस को उन्होंने वाट्स एप पर फोटो भी भेजीं।
बिजनौर रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद उन्होंने वहां के एटीएम से एक हजार रुपये निकाले। उसके बाद उन्होंने कोलकाता जाने का इरादा छोड़ देहरादून घूमने का फैसला किया। जम्मू में बच्चों ने एटीएम से दस हजार रुपये निकाले थे। वहां उन्होंने 3500 रुपये रोजाना की दर से होटल लिया।
लोकेशन मिलने के बाद तमाम होटलों की जांच
देहरादून में बच्चों ने एटीएम से दो बार 5-5 सौ रुपये निकाले। इस तरह एटीएम से उन्होंने कुल 12 हजार रुपये निकाले, लेकिन पैसे खत्म होने के बाद वे उस होटल को छोड़ सस्ते होटल में शिफ्ट कर गए। एसपी ने बताया कि पुलिस के निर्देश पर बच्चों के घर वाले लगातार एटीएम में रुपये डाल रहे थे, ताकि उनकी लोकेशन का पता चल सके।
देहरादून में होटल के पास के एटीएम की लोकेशन मिलने के बाद पुलिस टीम ने वहां पहुंच तमाम होटलों की जांच की। इसके बाद तीनों लड़के मिले। उल्लेखनीय है कि 28 अक्तूबर को एक ही स्कूल में पढ़ने वाले तीनों छात्र अचानक लापता हो गए थे।
इसके बाद तीनों के परिवार वालों ने पुलिस को शिकायत दर्ज करवाई थी। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एसडीपीओ परबीत, सिटी एसएचओ केके गुप्ता और रेजीडेंसी पुलिस चौकी प्रभारी अल्ताफ उपस्थित थे।
पहले भी एटीएम से निकाले थे मशकूर ने रुपये
यह पहला अवसर नहीं है कि मशकूर ने अपने पिता के एटीएम से रुपये निकाले। मशकूर के भाई ने बताया कि उनके पिता पीएचई में काम करते हैं। उनकी पोस्टिंग बाहर होने के कारण उन्होंने एटीएम कार्ड घर पर छोड़ रखा है, ताकि घर वाले जरूरत पड़ने पर रुपये निकाल लें। एटीएम कार्ड पहले मशकूर के बड़े भाई के पास था।
उसके बाद मशकूर ने यह कहकर एटीएम कार्ड ले लिया कि पिता ने उसे रखने को कहा है। इस दौरान उसने एटीएम से लगभग दस हजार रुपये निकाल दोस्तों के साथ उड़ाए, लेकिन उसे जब पता चला कि घर वालों को पता चल जाएगा तो उसने बाहर जाने का प्लान बनाया और अपने दोस्तों को भी तैयार कर लिया।
मशकूर के साथ रवाना हुए आसिफ के पास सिर्फ दस रुपये थे। वह अपने घर में किसी दोस्त के घर बर्थडे पर जाने की बात कहकर निकला था।
तीनों ने अब स्कूल न जाने की योजना बनाई थी
फरार होने वाले बच्चों की मानसिकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने दोबारा स्कूल न जाने का मन बना लिया था। जम्मू से फरार होने के पहले स्कूल में एक कापी में लिखा कि वे अब कभी स्कूल नहीं आएंगे।
इस पर तीनों ने अपने हस्ताक्षर भी किए। इसका खुलासा बाद में हुआ। इतना ही नहीं, आरूष के पिता ने पढ़ाई न करने और आसिफ के पिता ने घर लेट से आने पर उन्हें डांटा था, जिसके कारण वे खफा थे।
एसपी ने कहा कि उन्होंने अभिभावकों को भी कहा है कि वे अपने बच्चों पर नियंत्रण रखें।