मीराबाई चानू के साथ 2014 से काम कर रहा हूं। 2016 में रियो ओलंपिक की जब हम मेडल नहीं जीत पाए तो उस नाकामी ने हमें निराश करने के बजाय प्रेरित किया। 2016 से सबक लेते हुए हमने हर कदम को ओलंपिक पर केंद्रित रखा। 2016 जिस पैट्रन में हमारी ट्रेनिंग थी उसमें बदलाव किया और सकारात्मक सोच के अपने तैयारी को लगातार जारी रखा। इसके परिणाम हमें दिखने भी लगे। 2017 में मीरा विश्व चैंपियन बनी। 2018 में राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड जीता। 2019 में फिर विश्व चैंपियनशिप में मेडल जीता। यानी की 2016 के बाद हमारा हर कदम ओलंपिक की तैयारी पर ही केंद्रित था।
इन पांच सालों की यात्रा में हमने अच्छे और बुरे दिन देखे, लेकिन हमने अपने लक्ष्यों को कभी धुंधला नहीं पड़ने दिया। इसमें सरकार का सहयोग काफी अच्छा मिला। अच्छी ट्रेनिंग के लिए दो बार यूएस भेजा, जिससे हमारी तैयारी और पुख्ता हुई, लक्ष्य स्वर्ण पदक का था, लेकिन हम सिल्वर जीतने में कामयाब हुए।
खेलों में बेहतर करने के लिए नशे से रहें दूर
उन्होंने स्थानीय युवाओं से कहा कि आगे बढ़ने और खेलों में बेहतर करने के लिए नशे से दूर रहना होगा। अपनी ट्रेनिंग को अनुशासन के साथ नियमित जारी रखना होगा। आपको यह सोचकर अपना ट्रेनिंग करनी होगी कि अगर मीराबाई चानू मेडल ला सकती है तो हम भी जीत सकते हैं।