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पुराने आतंकी रूट का हो रहा इस्तेमाल, कश्मीर से वाया बिलावर भेजा जा रहा विस्फोटक!

Wed, 02 Oct 2019 01:43 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

जम्मू में पांच साल पहले, कश्मीर में फरवरी में बैलेस्टिक एक्सपर्ट हो चुके हैं रिटायर
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सुरक्षाबल - फोटो : फाइल, अमर उजाला
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विस्तार
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आतंक फैलाने के लिए आतंकी संगठन हर दाव पेंच आजमा रहे हैं। कश्मीर में सख्ती होने से बौखलाए आतंकी जम्मू सहित अन्य जगहों पर हमले करने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए पुराने आतंकी रूटों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो आतंकी कश्मीर से वाया बिलावर जम्मू में विस्फोटक सामग्री और हथियार पहुंचा रहे हैं। जो कश्मीर के अनंतनाग, डोडा और कठुआ जिले को जोड़ता है। इस रूट पर सेना और पुलिस की नजर भी कम है। कभी यह रास्ता आतंकियों द्वारा इस्तेमाल होता रहा है। 
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जानकारी के अनुसार बिलावर-कटली-लोहाई-मलार- डोडा-अनंतनाग वह रूट है, जो अनंतनाग और बिलावर को जोड़ता है। इसकी लंबाई लगभग 30 किलोमीटर है। बीच-बीच में कुछ आबादी वाले इलाके हैं। अनंतनाग से यदि बिलावर तक पैदल आना हो तो 4 से 5 घंटे लगते हैं। क्योंकि इस रूट पर कोई बस सेवा नहीं है। न ही कोई पक्का रास्ता है।

इसलिए लोग पैदल ही आते जाते हैं। कुछ दिन पहले ही बिलावर के गांव टेड़ फिंतर निवासी एक व्यक्ति के घर से 40 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी। अब फिर से इसी गांव के निवासी दंपति ने जम्मू में विस्फोटक पहुंचाया है। 
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सूत्रों का कहना है कि यह सामग्री कश्मीर से वाया उक्त रूट के जरिये क्षेत्र में पहुंचाई गई है। इस रूट पर कुछ वर्ष पहले आतंकियों से सुरक्षा बलों की मुठभेड़ भी हुई थी। इस रास्ते पर सेना और पुलिस की मूवमेंट और हलचल कम है। इसलिए आतंकी इस शांत इलाके का इस्तेमाल कर रहे हैं। संभव है कि विस्फोटक सामग्री को कश्मीर से बिलावर तक पहुंचाया गया है। जिसेे जम्मू में पहुंचाया जाना था। 
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एक्सपर्ट हैं नहीं, कैसे हो विस्फोटक की जांच

राज्य में विस्फोटक सामग्री की पहचान को लेकर पुलिस और गृह विभाग कितना गंभीर हैं, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां जांच के लिए कोई एक्सपर्ट ही नहीं है। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) के बैलेस्टिक विभाग के एक्सपर्ट विस्फोटक सामग्री की पहचान करते हैं।

पुलवामा जैसे हमले से लेकर बिलावर में पकड़े गए 40 किलो विस्फोटक का अब तक पता नहीं लग पाया है कि आखिर था क्या? अब फिर से जम्मू के बस स्टैंड में विस्फोकट सामग्री पकड़ी गई है। सूत्रों का कहना है कि यह आरडीएक्स है, लेकिन पुलिस इस स्थिति में नहीं है कि यह बता पाए कि यह है क्या? जानकारी के अनुसार विस्फोटक सामग्री की पहचान बैलेस्टिक एक्सपर्ट करता है।

जम्मू में पांच साल पहले ही बैलेस्टिक एक्सपर्ट रिटायर हो चुके हैं, जबकि कश्मीर में इसी साल फरवरी में बैलेस्टिक एक्सपर्ट रिटायर हुए हैं। कई माह से एफएसएल बिना एक्सपर्ट के चल रहा है। यहीं नहीं, फिजिक्स, केमिस्ट्री, नारकोटिक्स, टैक्सोलॉजी और फिंगरप्रिंट के एक्सपर्ट भी डेढ़ साल में रिटायर हो जाएंगे। एफएसएल पूरी तरह से डिफंक्ट होने की कगार पर है, लेकिन इसे लेकर कोई गंभीर नहीं दिख रहा है।

एफएसएल के संयुक्त सचिव ने नौ अप्रैल 2018 को पुलिस विभाग और गृह विभाग के पास प्रस्ताव भेजा था। इसके तहत एफएसएल के पास एक्सपर्ट आने थे, लेकिन अब तक यह प्रस्ताव धूल फांक रहा है। गृह विभाग और पुलिस दोनों ही इसे लेकर गंभीर नहीं हैं।

नहीं मिला कोई जवाब
अमर उजाला ने गृह विभाग के गृह सचिव शालीन काबरा और डीजीपी दिलबाग सिंह दोनों से इस मामले पर बात करनी चाही, लेकिन उनकी तरफ से इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया गया। 
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