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सात समंदर पार कर जल्द ही घराना वेटलैंड पहुंचेंगे विदेशी मेहमान, इनकी चहचहाहट से झूम उठता है इलाका

Sat, 16 Nov 2019 04:11 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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migratory birds - फोटो : अमर उजाला
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भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घराना वेटलैंड में हर वर्ष सर्दी में हजारों मील की लंबी उड़ानें भरकर यहां पहुंचने वाले प्रवासी पक्षी अभी तक घराना वेटलैंड में नहीं पहुंचे हैं। इसके लिए वन्यजीव संरक्षण विभाग की तरफ से तालाब की सफाई करवाई गई है। हर वर्ष अक्तूबर-नवंबर में यहां प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। इस वर्ष अभी प्रवासी पक्षियों की झलक यहां के लोग नहीं देख पाए हैं।

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लोगों का मानना है कि सात समंदर पार हर वर्ष अक्तूबर में यहां हजारों की संख्या में पहुंचने वाले प्रवासी पक्षी मार्च-अप्रैल तक यहां रुकने के बाद चले जाते हैं। घराना वेटलैंड करीब 750 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यहां पर वन्य जीव संरक्षण विभाग द्वारा बर्ड वाचिंग के लिए मचान व 40 फुट ऊंचा मचान बनाया गया है। यहां से पर्यटक तालाब में अठखेलियां करते हुए प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए पहुंचते हैं।

वन्य जीव संरक्षण विभाग द्वारा पर्यटक स्थल के तौर पर उभारे जाने के लिए 1500 कनाल भूमि वेटलैंड की होने पर सरकार द्वारा इसकी निशानदेही की गई। लेकिन अभी तक उक्त स्थान की भूमि पर ग्रामीणों का मालिकाना हक होने और दूसरी जगह पर भूमि मुहैया कराए जाने की मांग की वजह से मामला अटका पड़ा है। इस कारण घराना का वेटलैंड विकसित नहीं हो पाया। 

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साइबेरिया, दक्षिण अफ्रीका से पहुंचते हैं पक्षी

साइबेरिया, दक्षिण अफ्रीका से पहुंचते हैं पक्षी

घराना वेटलैंड में हर वर्ष विभिन्न प्रजाति के प्रवासी पक्षी आते हैं। यह साइबेरिया, दक्षिण अफ्रीका सहित अन्य देशों से आते हैं। सुबह होते ही इनकी चहचहाहट से पूरा क्षेत्र मानों झूम उठता है। इन पक्षियों के इसी माह यहां पहुंचने की संभावना है। इन्हें देखने के लिए भी यहां काफी संख्या में पक्षी प्रेमी पहुंचते हैं और उनकी अठखेलियों को अपने कैमरे और मोबाइल में कैद करते हैं।

यहां पहुंचने वाले प्रवासी पक्षी किसानों की खेतों में लगी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस समय खेतों में धान की फसल लगी है। यहां प्रवासी पक्षियों के आने पर फसल को नुकसान पहुंचाए जाने की चिंता लगी है। -नायब सरपंच बचन लाल, पंच मितल चौधरी, सुरेंद्र चौधरी।

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