पीएम नरेंद्र मोदी के साथ महबूबा मुफ्ती
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कश्मीर में लोकसभा की दो सीटों पर हो रहे उपचुनाव की जंग अलगाववाद बनाम राष्ट्रवाद में तब्दील हो रही है। नेशनल कांफ्रेंस ने अलगावावदियों और उपद्रवियों का समर्थन हासिल करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी है।
मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री का ओहदा संभाल चुके फारूक अब्दुल्ला खुलकर उपद्रवियों के समर्थन में खड़े होते नजर आ रहे हैं जबकि राष्ट्रवाद का प्रतिनिधित्व उस पीडीपी के हाथ है जिसकी पृष्ठभूमि अलगाववादियों के प्रति नरमी के लिए मशहूर रही है।
फिलवक्त मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कश्मीर नीति को रियासत के हित में बताते हुए मोर्चा संभाल रखा है। श्रीनगर की सीट पीडीपी के अलग हुए तारिक हमिद कर्रा के इस्तीफे से खाली हुई है जबकि अनंतनाग सीट को मुख्यमंत्री बनने के बाद महबूबा मुफ्ती ने छोड़ दी है।
श्रीनगर से किस्मत आजमा रहे हैं फारूक अब्दुल्ला
पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला
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कांग्रेस और नेकां के संयुक्त प्रत्याशी पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला श्रीनगर सीट से लोकसभा में इंट्री के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। अलगाववादियों का संयुक्त मोर्चा चुनाव बहिष्कार के लिए मस्जिद कमेटियों का इस्तेमाल करते हुए जुलाई 2016 जैसे बंद और हड़ताल का प्रयास कर रहा है।
इस कारण मतदान का प्रतिशत कम होने के आसार हैं। यह स्थिति पीडीपी के पक्ष में जा सकती है, लिहाजा फारूक ने अब ईवीएम के इस्तेमाल पर भी सवाल खड़ा करना शुरू कर दिया है। फारूक कहते हैं कि ईवीएम से डर लगता है।
उपद्रव की आशंका के कारण चुनाव प्रचार खुले स्थानों में नहीं बल्कि बंद कमरों तक सीमित हो रहे हैं। नेंका ने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने की साजिश का आरोप लगाते हुए पीडीपी को भाजपा और आरएसएस का एजेंट करार दिया है। अफस्पा को नहीं हटाए जाने के लिए भी नेकां ने पीडीपी को ही जिम्मेदार ठहराया है।
जितेंद्र सिंह ने फारूक के बयान पर दी प्रतिक्रिया
पीएमओ में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह
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कश्मीर की सियासत की यह स्थायी फितरत है कि नेकां और पीडीपी में से जो दल सत्ता से बाहर होता है वह खुद को अलगावावदियों की चिरौकी में जुट जाता है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह कहते हैं कि फारूक फिलहाल सत्ता से बाहर है इसलिए अलगाववाद का झंडा बुलंद कर कर रहे हैं।
वहीं जब सत्ता में होते हैं तो कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते रहे हैं। यह सुविधा परस्त सियासत है जिसे कश्मीर की अवाम को समझना होगा। अनंतनाग पीडीपी का मजबूत किला माना जाता है। इस सीट से मुफ्ती मोहम्मद सईद के पुत्र और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के भाई तसद्दुक मुफ्ती किस्मत आजमा रहे हैं।
तसद्दुक के सामने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर की चुनौती है। कश्मीर हिंसा में यह इलाका सबसे अधिक प्रभावित रहा है। इस कारण मतदान का प्रतिशत घटने की आशंका है। नेकां इस सीट पर कांग्रेस के पक्ष में अलगावादियों की नरमदिली के लिए प्रयासरत है।