पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग करने के फैसले के खिलाफ कोर्ट में जाने से इनकार कर दिया है। कहा कि वह कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाएंगी, बल्कि जनता की अदालत में जाएंगी।
महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर कहा कि मेरे शुभचिंतकों ने राज्यपाल के फैसले को कोर्ट में चुनौती देने की सलाह दी। पीडीपी, कांग्रेस और नेकां राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए एक साथ आए थे। मेरा यह मानना है कि हमें जनता की अदालत में जाना चाहिए। जनता की अदालत अन्य किसी भी दूसरे मंच से ऊपर है।
मालूम हो कि राज्यपाल ने जम्मू कश्मीर विधानसभा को 21 नवंबर को भंग कर दी थी । इस फैसले से कुछ घंटे पहले ही पीडीपी ने कांग्रेस और नेकां के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया था। इसके बाद दो विधायकों वाली सज्जाद लोन की पीपुल्स कांफ्रेंस ने भाजपा व 18 विधायकों के समर्थन में सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया था।
इस पूरे नाटकीय घटनाक्रम पर राज्यपाल ने विधानसभा भंग करने का फैसला कर विराम लगा दिया था। फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि मलिक ने विधायकों के खरीद फरोख्त को रोकने के लिए विधानसभा भंग करने का निर्णय लिया। राज्य में 19 जून को राज्यपाल का शासन लगाया गया था। जब भाजपा, पीडीपी और गठबंधन सरकार से हट गई थी। इस समय विधानसभा भंग नहीं करके उसे निलंबित कर दिया था।