महबूबा मुफ्ती की सरकार ने कश्मीर के बिगड़े हालात के मद्देनजर अनंतनाग उपचुनाव को टालने की गुहार लगाई है। रियासत सरकार ने अनंतनाग उपचुनाव नवंबर में कराने की सलाह चुनाव आयोग को दी है। घाटी के बिगड़े हालात पर डीजीपी ने आयोग को रिपोर्ट भेजी है, जिसमें माहौल को उपचुनाव के अनुकूल नहीं बताया गया है।
इस बीच सुरक्षा एजेंसियों ने भी केंद्र को भेजी रिपोर्ट में घाटी की स्थिति को बेहद खराब बताया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहले भी श्रीनगर उपचुनाव टालने की सलाह आयोग को दी थी। अब आयोग हालात की समीक्षा और सियासी दलों के साथ विचार-विमर्श के बाद निर्णय लेगा। वर्तमान हालात में अनंतनाग में उपचुनाव टलने के आसार बढ़ गए हैं।
सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिणी कश्मीर में हालात काफी बिगड़ गए हैं। अनंतनाग दक्षिणी कश्मीर में ही हैं। कुलगाम, पुलवामा, अनंतनाग और शोपियां में आतंकियों ने सियासी दलों के कार्यकर्ताओं से बंदूक के दम पर इस्तीफे लेना शुरू कर दिया है। इस्तीफे के बाद सियासी दलों के कार्यकर्ताओं को मस्जिद में ले जाकर माफीनामा लिया जा रहा है। आतंकी संगठन इसका वीडियो भी बना रहे हैं और उन्होंने अन्य नेताओं के लिए धमकी के तौर पर वायरल भी किया जा रहा है।
आतंकियों के निशाने पर सियासी लोग
आतंकियों के निशाने पर सियासी लोग
- फोटो : डेमो फोटो
अनंतनाग, शोपियां, कुलगाम और पुलवामा में 36 से अधिक सियासी कार्यकर्ताओं से इस्तीफे लिए जा चुके हैं। माफीनामे में इन कार्यकर्ताओं ने सियासत से तौबा करने की कसमें भी खाई हैं। वायरल हो रहे वीडियो में सियासी कार्यकर्ताओं को आतंकियों के आगे माफी मांगते हुए दिखाया गया है। इससे पहले मंत्रियों और विधायकों पर भी आतंकियों ने हमले किए हैं।
इस स्थिति के कारण सियासत से जुड़े लोगों में भय और दहशत का माहौल है। स्थिति को महसूस करते हुए मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि घाटी में मुख्य धारा की पार्टियों के लिए जमीन सिकुड़ रही है। श्रीनगर उपचुनाव में महज 7 फीसदी वोट पड़ने से अलगाववादियों के वोट बहिष्कार का असर साफ दिखा था। पुनर्मतदान में यह प्रतिशत घटकर दो फीसदी पर पहुंच गया।
पुलिसकर्मियों पर नौकरी छोड़ने का दबाव
आतंकियों ने दी धमकी
- फोटो : डेमो फोटो
आतंकी संगठन और उपद्रवी पुलिसकर्मियों पर नौकरी छोड़ने का भी दबाव बनाने लगे हैं। दक्षिणी कश्मीर में पुलिस कर्मियों के परिवार वालों को धमकाया जा रहा है। पुलिसकर्मियों के परिवार वालों पर तीन हमले हो चुके हैं। यही कारण है कि जम्मू कश्मीर के इतिहास में पहली बार पुलिस मुख्यालय ने पुलिसकर्मियों को उनके पैतृक घर नहीं जाने की हिदायत देते हुए एडवाइजरी जारी की।