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सर्वदलीय बैठक में शांति प्रक्रिया में सभी पक्षों को शामिल करने पर सहमति

Thu, 21 Jul 2016 10:24 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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सरकार की सर्वदलीय बैठक - फोटो : Amar Ujala
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कश्मीर हिंसा के बीच मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में रियासत के हालात पर पांच घंटे तक गंभीर मंथन हुआ।
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बैठक में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर संसद में दिखी राजनीतिक सहमति का स्वागत करते हुए कश्मीर की समस्याओं के समाधान के लिए राष्ट्रीय पहल शुरू करने की आवश्यकता बताई गई। इसके साथ ही शांति तथा सुलह की प्रक्रिया में सभी पक्षों को शामिल करने पर सहमति बनी।

आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद फैली हिंसा पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन धारण कर मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। एसकेआईसीसी में हुई बैठक में घाटी में मौजूदा कानून व्यवस्था की स्थिति पर विचार किया गया। नेकां ने बैठक का बहिष्कार किया, जबकि अन्य दलों के नुमाइंदे मौजूद रहे। बैठक में विपक्ष के निशाने पर सरकार रही। 
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ह‌िंसा पर चर्चा के ल‌िए व‌िधानसभा सत्र बुलाने की मांग

सीएम महबूबा मुफ्ती और ड‌िप्टी सीएम न‌िर्मल स‌िंह - फोटो : File Photo
सूत्रों का कहना है कि बैठक में विपक्षी दलों ने सरकार की ओर से किए गए प्रयासों पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि इस मामले में पीडीपी-भाजपा की सरकार देर से जगी। बुरहान के मारे जाने के बाद वह लोगों की नब्ज टटोलने में विफल रही।

बैठक में प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग पर भी नाराजगी जताई गई। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीए मीर ने कश्मीर हिंसा पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की।

पैंथर्स पार्टी के नेता हर्षदेव सिंह तथा बलवंत सिंह मनकोटिया ने राज्यपाल शासन की वकालत की। सीपीआई (एम) विधायक मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय सहमति बनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक के बाद प्रवक्ता ने बताया कि बैठक से नेकां के अनुपस्थित रहने पर मुख्यमंत्री ने निराशा जताते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं नेकां के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से बैठक में शामिल होने का अनुरोध किया था। इसके बाद भी वे नहीं आए। उन्होंने अन्य विपक्षी दलों के बैठक में शामिल होने पर आभार जताया। 

बैठक में पारित प्रस्ताव
1. कश्मीर हिंसा में मारे गए लोगों व घायलों के प्रति गहरी संवेदना।
2. संसद के दोनों सदनों में कश्मीर मुद्दे पर नजर आई राजनीतिक सहमति को आगे बढ़ाते हुए रियासत के हालात सुधारने के लिए राष्ट्रीय पहल शुरू की जाए।
3. शांति तथा सुलह की प्रक्रिया में सभी हकदारों को शामिल किया जाए।
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