मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंधों की वकालत करते हुए दोनों देशों के नेतृत्व से संबंध सुधारने के लिए कदम उठाने की अपील की। कहा कि दोनों पड़ोसियों के बीच दुश्मनी तथा हिंसा कम होने के लिए दोस्ती ही एकमात्र रास्ता है।
पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की दूसरी पुण्यतिथि पर रविवार को अनंतनाग जिले के बिजबिहाड़ा स्थित समाधि के पास आयोजित सभा में कहा कि सीमा पर गोलाबारी के दौरान दोनों ओर के लोगों की जान जाती है। लोगों में असुरक्षा का माहौल पैदा होता है।
राज्य ने काफी रक्तपात देखा है। इससे बाहर निकलने का समय आ गया है। आखिर कब तक खून बहते देखते रहेंगे? दोनों देशों के लोगों के बीच घृणा को एक शांति कथा में बदलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंसा ने लोगों को केवल दु:ख दिया है।
राज्य को इस दुष्चक्र से बाहर निकलने की जरूरत है। राज्य में गठबंधन सरकार की गठन के पीछे भी यही मकसद रहा है और सरकार इस पर गंभीर है। मुफ्ती को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे एक सोच और मिशन के निर्माता थे, जिनका एकमात्र उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को बार-बार के दुखों से बाहर निकालना था।
अपने लोगों को समृद्धि और शांतिपूर्ण समय प्रदान करना था। उन्होंने कहा कि अधिक मार्गों का खुलना, दोनों देशों और लोगों के बीच बेहतर पड़ोसी संबंधों की स्थापना भी सपना था। अफसोस जताया कि वाजपेयी काल में उन्होंने शांति बहाली के कई प्रयास किए, लेकिन वर्ष 2005 में पद से हटने के बाद चीजें इतनी गंभीरता से नहीं ली गईं।
उनकी दूरदृष्टि और दर्शन हर गुजरते दिन के साथ अधिक प्रासंगिक हो रहा है क्योंकि उपमहाद्वीप में स्थिति में सुधार होता है। इससे पहले वे मुफ्ती मोहम्मद सईद के मकबरे पर गईं। उन्होंने राज्य के लोगों के साथ फातेहा पढ़ा और पुष्पांजलि दी। इस दौरान मंत्री, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग फातेहा पढ़ने के लिए दारा शिकोह पार्क आए थे।