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विधानसभा में महबूबा मुफ्ती को मांगनी पड़ी माफी, मंत्री ने विधायक पर की थी धमकी भरी टिप्पणी

Thu, 06 Jul 2017 12:15 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली,अमर उजाला/श्रीनगर
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती - फोटो : File Photo
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विधानसभा में जीएसटी पर चर्चा के दौरान अपने एक कैबिनेट मंत्री की ओर से नेकां विधायक के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी पर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सदन में माफी मांगी। इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष ने भी सदस्यों से सदन की गरिमा का ख्याल रखने को कहा।
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स्पीकर ने भी सदस्यों द्वारा असंसदीय भाषा के प्रयोग पर उन सदस्यों की ओर से माफी मांगी। स्पीकर ने कहा कि जो कुछ कल हुआ उसके लिए वह सबसे माफी मांगते हैं। सदन में पहली बार मुख्यमंत्री को अपने मंत्री के आचरण के लिए माफी मांगनी पड़ी। 

विधानसभा अध्यक्ष कवींद्र गुप्ता जैसे ही बुधवार को सदन में पहुंचे तो नेकां विधायक देवेंद्र सिंह राणा ने अपनी सीट पर खड़ा होते हुए मंत्री की ओर से की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का मुद्दा उठाया।
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'मेरी जान को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी'

नेकां विधायक देवेंद्र सिंह राणा - फोटो : File Photo
विधायक ने कहा कि अध्यक्ष विधानसभा के संरक्षक है। सदस्य होने के नाते उन्होंने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एक याचिका दायर की है। पीडीपी मंत्री की ओर से इस्तेमाल किया शब्द क्रिमिनल एक्ट के दायरे में आता है। यदि मेरी जान को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

वे इस मामले में डीजीपी को एफआईआर के निर्देश दें। ऐसे शब्द सदन की गरिमा को शोभा नहीं देते। नेकां विधायक अब्दुल मजीद लारमी और अल्ताफ कल्लू ने भी समर्थन दिया तो भाजपा सदस्यों ने स्व. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के लिए इस्तेमाल किए गए अपमानजनक शब्दों का मुद्दा उठाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
 
हंगामा थमता न देख कानून मंत्री अब्दुल हक खान ने कहा कि मंगलवार को नेकां और राणा के बीच नोकझोंक हुई तो दोनों ने एक दूसरे का माखौल उड़ाया। एक कमेटी का गठन किया जाना चाहिए जो सदन की कार्यवाही पर नजर रखे ताकि सदन की गरिमा बनी रह सके। इस बीच खेल मंत्री इमरान रजा अंसारी ने भी अपने द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों पर सफाई दी। 
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हंगामे के बाद सीएम ने खुद संभाली स्थिति

सीएम महबूबा मुफ्ती - फोटो : AMAR UJALA
हंगामा जारी देख अध्यक्ष कवींद्र गुप्ता ने सभी सदस्यों से अपील की कि वह सभी जिम्मेदार सदस्य होने के नाते सदन की गरिमा बनाएं रखें। कोई किसी को चोर कहता है कोई गद्दार, ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि ऐसे जो भी शब्द इस्तेमाल हुए हैं जिससे किसी की इज्जत को ठेस पहुंची हो उन्हें सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाए। 

स्पीकर द्वारा माफी मांगे जाने, खेल मंत्री के सफाई देने और सभी आपत्तिजनक शब्दों को रिकार्ड से हटाए जाने के बावजूद जब मामला नहीं थमा और राणा बार-बार स्पीकर से इस मुददे पर उनके फैसले के बारे में पूछते रहे तो मुख्यमंत्री ने खुद स्थिति को संभाला।

सदन में लिंच शब्द को लेकर हुए हंगामे को देख रही मुख्यमंत्री ने हस्ताक्षेप करते हुए कहा कि कल जब उनके सहयोगी ने लिंच शब्द का इस्तेमाल किया तो वे भी स्तब्ध रह गई थीं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन उन्होंने जिस संदर्भ में यह शब्द इस्तेमाल किया है बेशक उसका वह मतलब नहीं जो अब निकाला जा रहा है, लेकिन यह उचित नहीं था। इसलिए वे इसके लिए माफी मांगती हैं। इसके बाद राणा ने विवाद को विराम दिया। 
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