चार अप्रैल को सत्तासीन हुई पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार की पहली कैबिनेट बैठक का इंतजार लंबा होता जा रहा है। कैबिनेट बैठक में विधानसभा सत्र से लेकर निकाय चुनाव तक का भविष्य तय होना है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार रियासत में चुनाव विभाग निकाय चुनाव के लिए अपनी तरफ से मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने का काम पूरा कर चुका है। चुनाव करवाने का फैसला अब केवल रियासती सरकार को करना है। इसके अलावा विधानसभा सत्र को शीतकालीन राजधानी जम्मू में करवाना है या नहीं यह फैसला भी कैबिनेट बैठक पर ही टिका है।
इसके अलावा रियासती मुलाजिमों को साल 2015 के जुलाई महीने से डीए किश्त नहीं मिली है। कई विकास परियोजनाओं को भी कैबिनेट की मुहर का इंतजार होने के साथ-साथ राज्य प्रशासन और पुलिस में भी तबादलों पर मुहर कैबिनेट बैठक में लगाई जा सकती है।
वहीं जानकारी के अनुसार एनआईटी श्रीनगर में घटित मामले के बाद से रियासती सरकार का ध्यान इस मामले के शांत होने पर है। इस वजह से कैबिनेट बैठक अभी तक नहीं हो पाई है।