जम्मू। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का बीड़ा उठाने वाले लोग कभी पीछे मुड़कर नहीं देखते। ऐसी ही मिसाल हैं अधिवक्ता मीनू पाधा। मीनू ने शुरुआती दौर में ऑनलाइन वीडियो के माध्यम से महिलाओं को अधिकारों के प्रति जागरूक करना शुरू किया था। आज यह मुहिम सिर्फ जम्मू-कश्मीर तक ही सीमित नहीं है बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी महिलाओं को सशक्त बना रही है।
मीनू पाधा पांच वर्षों से महिला एवं बाल अधिकारों की रक्षा और न्याय दिलाने के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे पोक्सो और पॉश जैसे गंभीर कानून को लेकर विभिन्न मंचों के माध्यम से समाज को जागरूक कर रही हैं। इसके अलावा प्रदेश में महिला आयोग के गठन के लिए भी निरंतर प्रयासरत हैं। अब तक देशभर में 150 से अधिक जागरूकता व्याख्यान दे चुकी हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को आत्मनिर्भर व जागरूक बनाना है।
-
कई संस्थानों की समितियों में शामिल
कार्यस्थलों पर महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए मीनू कई प्रमुख संस्थानों की आंतरिक शिकायत समितियों (यौन उत्पीड़न रोकथाम समितियों) की सदस्य के रूप में सेवाएं दे रही हैं। इनमें माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय, जीजीएम साइंस कॉलेज, राजकीय डिग्री कॉलेज, पलौड़ा, दूरसंचार विभाग समेत अन्य संस्थान शामिल हैं। उनका संदेश है कि जब तक महिलाएं खुद अपने कानूनी अधिकार के प्रति जागरूक नहीं होंगी, तब तक समाज में सकारात्मक बदलाव आना नामुमकिन है।