सीड जर्म प्लाज्म केंद्र में उच्च पर्वतीय पौधों के अलावा अन्य औषधीय पौधों के बीज संरक्षित और उत्पादित किए जाएंगे। यह प्रक्रिया दस कनाल की जमीन पर की जाएगी। बीज के संरक्षण होने से बाद में इससे वनीकरण को बढ़ावा देने के साथ किसानों को औषधीय पौधे लगाने के लिए सीधा लाभ मिलेगा। इन बीज के माध्यम से किसान अपनी छोटी नर्सरी भी तैयार कर सकेंगे।
भद्रवाह कस्बे से दस किमी दूर पहाड़ी क्षेत्र ठनटेरा में आधुनिक नर्सरी और प्लाज्म केंद्र स्थापित होगा। आईएसएम के निदेशक डॉ. मोहन सिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए उचित प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए औषधीय पौधों का विस्तार किया जा रहा है। भद्रवाह में उच्च पर्वतीय औषधीय पौधा संस्थान पर काम हो रहा है।
औषधीय पौधों के उत्पादन के लिए वातावरण लाभदायक
भद्रवाह के जंगल और पहाड़ हिमालय शृंखला से जुड़े हैं। इसमें कई अनमोल औषधीय पौधे प्राकृतिक तौर पर लगते हैं, जिनकी आयुष जगत में भारी मांग है। इन पौधों के माध्यम से स्थानीय लोग पुरानी चिकित्सा पद्धति से लोगों का उपचार कर रहे हैं, लेकिन इन औषधीय पौधों का सही विस्तार नहीं हो पाया है। इन प्राकृतिक औषधीय पौधों के उत्पादन के लिए भद्रवाह के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों का वातावरण अनुकूल रहा है।