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हौसलों को सलाम: ट्राइसाइकिल से तीसरी बार मचैल माता की यात्रा पर निकलीं दिव्यांग, मां और ये 2 अनोखे साथी भी साथ

Thu, 30 Jul 2026 01:02 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, उधमपुर

सार

Mata Machail Yatra: यूपी की दिव्यांग तीर्थयात्री ज्योति अपनी मां मंकी बजरंग और कुत्ते कालू के साथ माता मचैल यात्रा पर हैं। ट्रेन दुर्घटना में दोनों पैर गंवाने के बावजूद, वह हाथ से चलने वाली तिपहिया साइकिल पर अपनी वार्षिक तीर्थयात्रा जारी रखे हुए हैं।
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दिव्यांग ज्योति के हौसलों को सलाम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश की रहने वाली दिव्यांग तीर्थयात्री ज्योति ने अपनी वार्षिक माता मचैल यात्रा जारी रखी है। वह अपनी माता के साथ इस कठिन तीर्थयात्रा पर निकली हैं। उनके साथ उनके पालतू जानवर, एक बंदर बजरंगी और एक कुत्ता कालू भी हैं।

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ज्योति ने एक दुखद रेल दुर्घटना में अपने दोनों पैर खो दिए थे। इस गंभीर शारीरिक चुनौती के बावजूद, उनका दृढ़ संकल्प और आस्था अडिग है। वह हर साल इस पवित्र तीर्थयात्रा को पूरा करती हैं। इस वर्ष भी वह हाथ से चलने वाली तिपहिया साइकिल के सहारे आगे बढ़ रही हैं। उनकी यह यात्रा अनेक लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। यह उनके अटूट विश्वास और अदम्य साहस का प्रतीक है।

माता मचैल यात्रा जम्मू और कश्मीर में एक महत्वपूर्ण तीर्थयात्रा मानी जाती है। ज्योति का इस यात्रा को जारी रखना उनके गहरे आध्यात्मिक जुड़ाव को दर्शाता है। उनकी यह दृढ़ता दिखाती है कि शारीरिक बाधाएं भी आस्था के मार्ग में रुकावट नहीं बन सकतीं। उनकी माता, बंदर बजरंगी और कुत्ता कालू का साथ उनकी यात्रा को और भी विशेष बनाता है। यह एक अनोखी और प्रेरणादायक कहानी है।
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श्री मचैल माता यात्रा शुरू
जम्मू-कश्मीर की दूसरी सबसे बड़ी और प्रसिद्ध श्री मचैल माता यात्रा पूरे उत्साह और उमंग के साथ प्रारंभ हो चुकी है। मौसम की खराब परिस्थितियों के कारण इस वर्ष यात्रा 28 जुलाई से शुरू की जा सकी, जबकि हर वर्ष यह 25 जुलाई से शुरू होती है। पवित्र धाम में श्रद्धालुओं के आगमन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

400 से अधिक श्रद्धालु मां मचैल के दर्शन कर चुके
मंदिर के मुख्य पुजारी मनोज सिंह ने बताया कि 25 जुलाई को हवन और विशेष पूजन-अर्चना कर मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिए गए थे। वर्तमान में यात्रा पूरी तरह सुचारु रूप से चल रही है। यात्रा शुरू होने के शुरुआती दो दिनों के भीतर ही 400 से अधिक श्रद्धालु मां मचैल के दर्शन कर चुके हैं।

अठोली के डीएसपी विजय भगत ने बताया कि गुलाबगढ़ बेस कैंप में बुधवार शाम तक 300 से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके थे। इनमें से कुछ श्रद्धालु बेस कैंप में रुके हुए हैं, जबकि अन्य पवित्र धाम की ओर रवाना हो चुके हैं। आगामी दिनों में मौसम अनुकूल रहने पर श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।
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सुरक्षा के कड़े इंतजाम
डीएसपी के अनुसार, एसएसपी किश्तवाड़ के निर्देशन में सुरक्षा के व्यापक और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यात्रा मार्ग पर सीआरपीएफ, एसडीआरएफ और भारतीय सेना के जवानों की उचित स्थानों पर तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुलभ आवाजाही के लिए प्रशासन ने इस बार आरएफआईडी कार्ड व्यवस्था अनिवार्य की है। ऑनलाइन पंजीकरण के बाद गुलाबगढ़ बेस कैंप में श्रद्धालुओं को यह कार्ड दिए जा रहे हैं, जिसके बिना यात्रा की अनुमति नहीं है।

सड़क सुविधा से सुगम हुई कठिन यात्रा
पिछले वर्ष चिशोती में बादल फटने की आपदा के समय सड़क मार्ग सीमित था। श्रद्धालुओं को करीब 8 किलोमीटर कठिन पैदल चलना पड़ता था। इस वर्ष प्रशासन की पहल से सड़क मार्ग माता चंडी के भवन से दो किलोमीटर नजदीक दर्शनी गेट तक पहुंच चुका है। गुलाबगढ़ से छोटे वाहनों द्वारा महज 200 किराये में लगभग दो घंटे में यहां पहुंचा जा सकता है। पहले इस मार्ग को पैदल तय करने में दो दिन तक लग जाते थे, वहीं अब दो घंटे में श्रद्धालु धाम तक पहुंच रहे हैं।
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