डुग्गन के दूर दराज इलाके में आबादी से कोसों दूर बर्फ से लदी पहाड़ों की चोटियों पर इस बार भी मां चंडी के जयकारे गूंजने लगे हैं। वार्षिक नुकनाली यात्रा के लिए भक्तों की आस्था देखते ही बनती थी। सोमवार सुबह दौले माता मंदिर से नुकनाली के लिए वार्षिक यात्रा रवाना हुई तो आसपास के पहाड़ भी जयकारों से गूंज उठे।
बनी, डुग्गन, गाडू, दौले और बाड़ी दुलान, छपाडू सहित आधा दर्जन अन्य इलाकों से चलकर चंडी मां के भक्त नुकनाली मंदिर में मंगलवार को पहुंचेंगे। डुग्गन से भद्रवाह की ओर रिहाइश से दूर बर्फ से लदकद पहाड़ों की इस दुर्गम यात्रा को कई सदियों से चलाया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि बनी और डुग्गन में बने चंडी मां के मंदिर नुकनाली से ही होकर जाते हैं। परंपरा के अनुसार नुकनाली में श्रद्धालुओं की भारी आस्था और इंतजामों के अभाव में भक्तों के लिए विभिन्न स्थानों पर चंडी माता के मंदिरों का निर्माण करवाया गया।
पिछले कुछ सालों में श्रद्धालुओं का आंकड़ा भी बढ़ा है। औसतन दस से पंद्रह हजार श्रद्धालु इस वार्षिक यात्रा में सम्मिलित होते हैं। सोमवार को रवाना हुई यात्रा में लगभग पंद्रह से बीस हजार श्रद्धालु शामिल रहे।